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मॉडल स्कूलों को शिक्षा विभाग में समायोजित न करने और टीजीटी अध्यापकों के नियुक्ति पत्र अभी तक जारी न करने पर शिक्षकों में रोष बढ़ रहा है। अध्यापक अपने भविष्य को लेकर शिक्षा निदेशालय के चक्कर लगा रहे है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
Nuh :  मेवात विकास बोर्ड की 30वीं बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेवात के विभिन्न खण्डों में स्थापित आठ मॉडल स्कूलों को शिक्षा विभाग में समायोजित करने का निर्णय लिया था। परंतु लगभग दो साल बीत जाने के बावजूद भी इन स्कूलों का शिक्षा विभाग में पूर्ण  रूप से समायोजन नहीं हो पाया है। टीजीटी अध्यापकों के नियुक्ति पत्र अभी तक जारी नहीं हुए है जिसके कारण अध्यापक अपने भविष्य को लेकर शिक्षा निदेशालय के चक्कर लगा रहे है।
 
कोरोना के समय में इन स्कूलों में कार्यरत दो टीजीटी अध्यापकों की मौत हो चुकी है। जबकि एक परिवार में तो पति व पत्नी दोनों की ही मौत हो चुकी है, फिर भी उनके परिवार को अभी तक एक्स ग्रेसिया का लाभ नहीं दिया गया। मेवात माडल स्कूल एसोसिएशन के पूर्व राज्य प्रधान एवं मुख्य सलाहकार सतीश खटाना ने बताया कि अध्यापकों के कागजातों का निदेशालय दो बार सत्यापन भी करा चुका है। साथ ही एसोसिएशन के प्रधान विजेन्द्र ने टीजीटी के नियुक्ति पत्रों में  देरी को लेकर विभाग के प्रति नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि इस संबंध में कई बार शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को बातचीत व पत्राचार के माध्यम से अवगत करा चुके हैं। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। बहुत से अध्यापक साथी मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गए है। शिक्षकों में शिक्षा विभाग के प्रति भारी रोष पनप रहा है l महासचिव कमरुद्दीन ने कहा कि यदि जल्द टीजीटी के नियुक्ति पत्र व समायोजन के दौरान कर्मचारियों पर लगाई गई अनुचित शर्तें नहीं हटाई गई तो शिक्षा सदन के सामने भूख हड़ताल करने पर विवश हो जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के सब्र का इम्तेहान न ले, इसका परिणाम काफी खतरनाक हो सकता है। 
 
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