हरियाणा की 'राजनीतिक राजधानी' कहे जाने वाले रोहतक में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम द्वारा सेक्टर-14 के सामने स्थित चौक का सौंदर्यीकरण करने के बाद उसका नाम बदलने पर शहरवासियों और विभिन्न संस्थाओं ने कड़ा रोष प्रकट किया है। आरोप है कि निगम ने कारगिल युद्ध के शहीद मेजर सज्जन सिंह गहलोत का नाम हटाकर वहां एक ऐसा नाम लिख दिया है, जिसका कोई अर्थ ही स्पष्ट नहीं है।
शहीद मेजर सज्जन सिंह का अपमान
लोकहित संस्था के अध्यक्ष चंचल नांदल ने इस बदलाव को शहीद की शहादत का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले मेजर सज्जन सिंह गहलोत के सम्मान में इस चौक का नाम रखा गया था।
गूगल पर भी नहीं मिला अर्थ
नांदल ने तंज कसते हुए कहा कि निगम ने चौक का नया नाम "रिजनने प्यार से रोहतक ते" रखा है, जिसका गूगल पर खोजने पर भी कोई मतलब नहीं मिल रहा। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा, "शहीदों की चिताओं पर हर वर्ष लगेंगे मेले..." लेकिन अगर उनके नाम ही मिटा दिए जाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा कहां से मिलेगी?
अठगामा तपा बोहर और राष्ट्रीय जाट सभा का समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन में केवल लोकहित संस्था ही नहीं, बल्कि अठगामा तपा बोहर और राष्ट्रीय जाट सभा के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर इतिहास और सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
DC और कमिश्नर को सौंपा जाएगा ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को चुपचाप नहीं बैठने देंगे। जल्द ही रोहतक के डीसी सचिन गुप्ता और नगर निगम कमिश्नर डॉ. आनंद शर्मा को इस मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। चौक का नाम तुरंत प्रभाव से दोबारा 'शहीद मेजर सज्जन सिंह गहलोत चौक' किया जाए। यदि प्रशासन ने उनकी मांग को अनसुना किया, तो शहरवासियों के साथ मिलकर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। चंचल नांदल, अध्यक्ष, लोकहित संस्था ने कहा कि "सौंदर्यीकरण के नाम पर किसी शहीद की पहचान को मिटाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहीद मेजर सज्जन सिंह गहलोत का नाम इस चौक की आत्मा है।"
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