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दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल रोहतक पीजीआई में भर्ती हैं। बातचीत के दौरान पत्नी के सामने ही उन पर फायरिंग कर दी। विवाद की मुख्य वजह जमीन, प्लॉट और कोठी सहित करोड़ों की संपत्ति है।

हरियाणा के झज्जर जिले के ढाकला गांव में इकलौते बेटे ने अपने ही पिता के खून से होली खेलने की कोशिश की। वारदात का कारण किसी पुरानी रंजिश को नहीं, बल्कि 18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति को बताया जा रहा है।  

अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे पीड़ित 
वारदात में गंभीर रूप से घायल हुए ईश्वर सिंह को दो गोलियां लगी हैं। हमला इतना जबरदस्त था कि एक गोली उनके कंधे और दूसरी जांघ को चीरते हुए निकल गई। लहूलुहान अवस्था में उन्हें पहले झज्जर के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत रोहतक पीजीआई (PGI) रेफर कर दिया गया। फिलहाल ईश्वर सिंह खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, लेकिन वे अब भी डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

मैं प्यार की भाषा बोल रहा था और उसने हथियार निकाल लिया...
अस्पताल के बिस्तर से अपनी व्यथा सुनाते हुए ईश्वर सिंह ने बताया कि वे अपने बेटे सतीश को केवल सही राह दिखाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं सतीश को समझा रहा था कि वह अपने चाचा की बातों में आकर परिवार को न तोड़े। मैं शांति से बात कर रहा था, लेकिन मेरी पत्नी के सामने ही उसने आपा खो दिया और मुझ पर गोलियां दाग दीं। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका अपना खून ही उनकी जान लेने पर उतारू हो जाएगा।

अधिकांश संपत्तियां भाई के नाम पर दर्ज होती रहीं  
इस खूनी संघर्ष के पीछे करोड़ों की जायदाद छिपी है। ईश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनके छोटे भाई ने मिलकर सालों तक संपत्तियां बनाईं, जिनमें से अधिकांश भाई के नाम पर दर्ज होती रहीं। इसी असमानता ने धीरे-धीरे दरार पैदा कर दी। विवादित संपत्तियों में शामिल हैं-
• ढाकला गांव: 3 किले ईश्वर सिंह के नाम और 8 किले उनके छोटे भाई के नाम।
• नजफगढ़ (दिल्ली): 350 गज की कोठी और 500 गज का कमर्शियल ऑफिस।
• झज्जर शहर: 450 गज का एक कीमती प्लॉट। 
ईश्वर सिंह ने यह भी साझा किया कि उन्होंने अपने भाई के बच्चों के लिए हमेशा त्याग किया, यहां तक कि उनकी शादी के खर्च के लिए अपनी जमीन भी बेची थी। 

निगरानी और जासूसी के गंभीर आरोप 
पीड़ित ईश्वर सिंह, जो दिल्ली पुलिस से हेड कांस्टेबल के पद से वीआरएस (VRS) ले चुके हैं, ने सनसनीखेज खुलासा किया कि उनकी जासूसी की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल फोन को टैप किया जा रहा था और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उनकी कार में जीपीएस (GPS) डिवाइस तक फिट की गई थी। इस संबंध में उन्होंने पहले भी पुलिस को शिकायत दी थी। 

जांच के घेरे में हथियार, गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी तेज 
वारदात के बाद पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में लगी है कि हमला किस हथियार से हुआ। ईश्वर सिंह का दावा है कि सतीश के पास अपना कोई लाइसेंसी हथियार नहीं है, जबकि उनके छोटे भाई के पास दो लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं। पुलिस इस बात की पुष्टि कर रही है कि गोली किसी अवैध कट्टे से चली या फिर घर में मौजूद लाइसेंसी गन से।  
झज्जर पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार आरोपी सतीश की गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी तेज कर दी है। गांव में इस घटना के बाद से ही सन्नाटा और दहशत का माहौल है, जहां एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी और उसके परिवार के बीच की यह कलह चर्चा का विषय बनी हुई है। 

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