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विधानसभा का बजट सत्र पहली बार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन विपक्ष ने बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है।

हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को शुरू हो गया है। प्रदेश के संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर था जब सदन की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गायन से की गई। इस गरिमामयी क्षण में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के तमाम विधायक एक साथ खड़े नजर आए। राष्ट्रगीत के बाद राज्यपाल प्रोफेसर असीम घोष ने अपना अभिभाषण पेश किया, जिसमें उन्होंने वर्तमान सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा रखने के साथ-साथ भविष्य के विकसित हरियाणा का खाका भी खींचा।

प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा ने लंबी छलांग लगाई 
राज्यपाल ने अपने करीब 35 मिनट के संबोधन में हरियाणा की आर्थिक मजबूती की सराहना कर कहा कि देश की कुल जीडीपी में हरियाणा 3.8 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान राज्य की विकास दर 9.5 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो प्रदेश की प्रगति की रफ्तार को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी हरियाणा ने लंबी छलांग लगाई है और अब यह 3.95 लाख रुपए तक पहुंच गई है, जो यहां के नागरिकों के उच्च जीवन स्तर का प्रमाण है। 


अभिभाषण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सरकार 'विकसित भारत' के संकल्प की तर्ज पर 'विकसित हरियाणा 2047' के विजन को लेकर संकल्पबद्ध है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सदन में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोग हैं, किंतु सभी का साझा लक्ष्य हरियाणा का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है। जीएसटी संग्रह के मामले में भी हरियाणा देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है और कुल राष्ट्रीय जीएसटी में इसकी हिस्सेदारी 7.34 प्रतिशत है, जिससे यह देश का पांचवां सबसे बड़ा राजस्व प्रदाता राज्य बन गया है। 

निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए 71 हजार की सहायता दी जा रही 
प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का विवरण देते हुए राज्यपाल ने बताया कि हरियाणा पूरे देश में सबसे अधिक वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करने वाला राज्य है। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के माध्यम से एक पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पात्र नागरिकों को 60 वर्ष की आयु पूर्ण होते ही बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे घर बैठे पेंशन मिलने लगी है। महिलाओं और बेटियों के सशक्तीकरण के लिए 'दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना' और 'मुख्यमंत्री विवाह योजना' जैसी पहल की गई हैं, जिसके अंतर्गत निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए 71 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। 


कृषि प्रधान राज्य होने के नाते किसानों के हितों की रक्षा को भी सरकार ने प्राथमिकता दी है। 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल के माध्यम से किसानों को कम लागत में अधिक लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी स्कीमों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार की 160 से अधिक योजनाओं का लाभ अब सीधे डीबीटी के जरिए लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा हो रहा है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है। 

सदन के बाहर प्रदर्शन 
एक ओर जहां सदन के भीतर बजट सत्र की प्रक्रिया शुरू हुई, वहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ की सड़कों पर एचपीएससी (HPSC) अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भर्ती प्रक्रियाओं से असंतुष्ट ये अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सेक्टर 17 बस स्टैंड के पास पुलिस ने रोक लिया और हिरासत में ले लिया। 


सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने सूचित किया कि पूर्व मंत्री अनिल विज ने पत्र भेजकर 20 फरवरी से 2 मार्च तक अवकाश की मांग की है, जिसके कारण वे सत्र के शुरुआती दिनों में अनुपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, सदन ने दिसंबर 2025 में लंबित पड़े सात संशोधन विधेयकों को आधिकारिक तौर पर पारित कर दिया। इनमें माता मनसा देवी, माता शीतला देवी और माता भीमेश्वरी देवी मंदिर बोर्ड से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन शामिल हैं। 

2.15 लाख करोड़ रुपये का बजट रहेगा इस बार 
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जो राज्य के वित्त मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, आगामी 2 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। जानकारों का मानना है कि इस बार बजट का आकार 2.15 लाख करोड़ रुपये के आसपास रह सकता है, जो पिछले वर्ष के 2.05 लाख करोड़ के मुकाबले काफी अधिक होगा।  


दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। नेता प्रतिपक्ष ने बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, किसानों के मुआवजे और परिवार पहचान पत्र जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की बात कही है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वे 24 और 25 फरवरी को विधानसभा की ओर विरोध मार्च निकालेंगे। यह सत्र 18 मार्च तक चलेगा, जिसमें कुल 17 दिनों के दौरान जनहित के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। 

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