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गुरुग्राम लोकसभा सीट पर जेजेपी ने बड़े चमत्कार की उम्मीद के साथ सेलिब्रिटी को प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया है। पिछले आंकड़ों को देखा जाए तो पार्टी प्रत्याशी राहुल यादव फाजिलपुरिया इस सीट पर बहुत बड़ा फेरबदल करने की स्थिति में फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।

नरेन्द्र वत्स, रेवाड़ी: गुरुग्राम लोकसभा सीट पर जेजेपी ने बड़े चमत्कार की उम्मीद के साथ सेलिब्रिटी को प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया है। पिछले आंकड़ों को देखा जाए तो पार्टी प्रत्याशी राहुल यादव फाजिलपुरिया इस सीट पर बहुत बड़ा फेरबदल करने की स्थिति में फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। इस सीट पर एक बार इनेलो अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है, लेकिन जेजेपी के अलग होने के बाद दोनों ही दलों को गुरुग्राम के मतदाताओं ने एक-एक फीसदी से कम में ही समेट दिया था। दोनों ही दल एक बार फिर अपना-अपना जनाधार बढ़ाने की दिशा में इस सीट पर पूरा जोर लगा सकते हैं।

2014 में राव इंद्रजीत को जाकिर हुसैन ने दी थी सीधी टक्कर

2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह को इनेलो की टिकट पर जाकिर हुसैन ने सीधी टक्कर देने में सफलता हासिल की थी। जाकिर का पार्टी से ज्यादा अपना जनाधार था, जिस कारण वह 20 फीसदी से अधिक वोट हासिल करने में कामयाब रहे थे। कांग्रेस के धर्मपाल डेढ़ लाख से कम मतों में सिमटकर तीसरे नंबर पर रहे थे। गत लोकसभा चुनावों में गुरुग्राम में चाचा अभय सिंह चौटाला ने इनेलो की टिकट पर विरेंद्र राणा को और भतीजे दुष्यंत ने जेजेपी की टिकट पर डॉ. महमूद खान को चुनाव मैदान में उतारा था। दोनों के परिणाम सुखद नहीं रहे थे। हलका वाइज मिले दोनों पार्टी प्रत्याशियों के वोटों में भी ज्यादा अंतर नहीं था।

दो हलकों में नहीं खुल पाया था खाता

नूंह जिले के पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका दोनों ही हलकों में इनेलो-जेजेपी खाता भी नहीं खोल पाए थे। इन हलकों में पूर्व सीएम चौ. ओमप्रकाश चौटाला का पहले व्यापक प्रभाव माना जाता था। पार्टी के दोफाड़ होने के साथ ही दोनों दलों के समीकरण इस क्षेत्र में बिगड़ गए। फाजिलपुरिया को प्रत्याशी बनाकर जेजेपी ने इस क्षेत्र में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले अपना जनाधार टटोलने का प्रयास शुरू किया है।

कई हलकों में बराबरी पर रखे दोनों

गुरुग्राम के सभी 9 हलकों में मतदाताओं ने गत लोकसभा चुनावों के दौरान इनेलो और जेजेपी दोनों के प्रत्याशियों को लगभग बराबरी पर रखा था। बावल में जेजेपी का पलड़ा भारी रहा था, तो बादशाहपुर और पटौदी में इनेलो प्रत्याशी को जेजेपी से ज्यादा वोट मिले थे। पार्टी में बिखराब का लोकसभा चुनावों में व्यापक असर देखने को मिला था। दोनों दलों की तुलना में बसपा का वोट बैंक संतोषजनक रहा था।

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