हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अवैध खनन और भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। विजिलेंस की टीम ने करोड़ों के राजस्व नुकसान से जुड़े खनन घोटाले में कार्रवाई करते हुए खनन विभाग के लिपिक (क्लर्क) चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
सहायक खनन अधिकारी के बाद क्लर्क पर गिरी गाज
बता दें कि करीब 10 दिन पहले ही इस मामले में पंचकूला से सहायक खनन अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान क्लर्क चंद्रशेखर की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद रेवाड़ी और नारनौल की संयुक्त विजिलेंस टीम ने उसे हिरासत में लिया। अधिकारियों के मुताबिक, विभाग के अंदर बैठे सफेदपोश कर्मचारी ही अवैध खनन के खेल को संरक्षण दे रहे थे।
ऐसे लगाया सरकार को लाखों का चूना
ACB की जांच में भ्रष्टाचार के जो तरीके सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
- जुर्माने में खेल: अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों पर NGT के आदेशानुसार भारी जुर्माना लगना था, लेकिन अधिकारियों ने मिलीभगत कर इसे आधा कर दिया।
- फर्जी दस्तावेज: वाहन मालिकों ने कम जुर्माना भरवाने के लिए फर्जी शपथ पत्र और गलत कीमत के दस्तावेज पेश किए, जिन्हें विभाग के क्लर्क और अधिकारियों ने बिना जांचे स्वीकार कर लिया।
- राजस्व की हानि: जांच के अनुसार, अकेले कुछ मामलों में ही सरकार को करीब 21 लाख रुपए की सीधी वित्तीय हानि पहुँचाई गई है।
17 लोगों पर FIR, अन्य की तलाश जारी
इस पूरे घोटाले में तत्कालीन खनन अधिकारी, सहायक खनन अभियंता और लिपिकों समेत कुल 17 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।लेकिन हाल ही में क्लर्क चंद्रशेखर समेत 16 ही गिरफ्तार हुए है। जबकि शेष आरोपियों की खोज अभी की जा रही है।
ACB का सख्त रुख
एसीबी के इंस्पेक्टर अशोक कुमार ने बताया कि गिरफ्तार क्लर्क चंद्रशेखर से पूछताछ की जा रही है ताकि इस सिंडिकेट के अन्य कड़ियों का पता लगाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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