हरियाणा सोनीपत के पॉश इलाके सेक्टर-14 में मंगलवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने मानवीय रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक घर के भीतर वर्षों से सुलग रही नफरत की आग ने दो जिंदगियां लील लीं। एक व्यक्ति ने अपने ही बड़े भाई की पत्नी (भाभी) की चाकू से गोदकर हत्या कर दी और वारदात को अंजाम देने के बाद खुद भी मौत को गले लगा लिया। पुलिस को घटनास्थल से दीवारों और अलमारियों पर लिखे कुछ चौंकाने वाले संदेश मिले हैं, जो इस दोहरे हत्याकांड और आत्महत्या के पीछे की गहरी रंजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
रसोई में मिला खून से लथपथ शव
घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। सूचना पाकर जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घर का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का मंजर रूह कंपा देने वाला था। घर की रसोई में बुजुर्ग महिला आशा देवी का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा था, उनके शरीर पर चाकू के कई वार किए गए थे। वहीं, पास ही डाइनिंग एरिया में उनके देवर महावीर सिंह का शव पंखे से लटका हुआ मिला। पुलिस ने तुरंत एफएसएल (FSL) और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों को बुलाकर साक्ष्य एकत्रित किए।
12 साल पुरानी रंजिश और अलमारी पर लिखे इल्जाम
शुरुआती तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि आरोपी महावीर सिंह अपने बड़े भाई बीर सिंह की मौत का बदला लेना चाहता था। ज्ञात हो कि बीर सिंह की मृत्यु साल 2014 में हृदय गति रुकने (हार्ट फेल) से हुई थी, लेकिन महावीर का मानना था कि उसके भाई की मौत के पीछे उसकी भाभी आशा, उनकी बहन और ननदोई का हाथ था।
अपनी इसी सनक और नफरत को महावीर ने मौत से पहले घर की दीवारों, बेड बॉक्स और अलमारी पर चॉक से लिखा था। उसने लिखा कि मेरे भाई की हत्या के लिए भाभी, उनकी बहन और दिनेश जिम्मेदार हैं। इसी प्रतिशोध की भावना ने उसे इस जघन्य अपराध के लिए उकसाया।
सेना से सेवानिवृत्त भाई ने दर्ज कराया मामला
मृतका आशा देवी के भाई अजित सिंह, जो मेरठ कैंट के निवासी और भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल हैं, ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनकी बहन आशा अपने पति की मृत्यु के बाद सेक्टर-14 स्थित मकान के ग्राउंड फ्लोर पर अकेले रहती थीं। उनका इकलौता बेटा साल 2000 में पढ़ाई के लिए विदेश गया था और 2006 के बाद से उसका परिवार से कोई संपर्क नहीं है। वहीं, आरोपी देवर महावीर सिंह अपने परिवार के साथ उसी मकान की पहली मंजिल पर रहता था।
डायल 112 पर आई कॉल
वारदात का खुलासा तब हुआ जब महावीर की पत्नी कुलवती ने 17 मार्च की दोपहर करीब 3:20 बजे पुलिस सहायता नंबर 'डायल-112' पर फोन किया। उन्होंने बताया कि घर अंदर से बंद है और कोई दरवाजा नहीं खोल रहा है। सेक्टर-27 थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा, जिसके बाद इस खौफनाक सच्चाई का पता चला। पुलिस ने ई-साक्ष्य ऐप के जरिए पूरी घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई है ताकि अदालती कार्यवाही के लिए पुख्ता सबूत रहे।
पोस्टमॉर्टम और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर सोनीपत के नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) के शवगृह में रखवा दिया है। बुधवार को दोनों का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। अजित सिंह की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एएसआई प्रदीप को इस संवेदनशील मामले की जांच सौंपी गई है।
रंजिश की भेंट चढ़े रिश्ते
पड़ोसियों और जानकारों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध थे। 2014 की एक प्राकृतिक मौत को 'हत्या' मान लेना और उस पर वर्षों तक नफरत पालना इस दुखद अंत का कारण बना। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या महावीर ने इस वारदात की योजना पहले से बना रखी थी या यह आवेश में उठाया गया कदम था।
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए haribhoomi.com के साथ।










