हरियाणा राज्यसभा चुनाव की जीत के बाद कांग्रेस के भीतर उठा सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने उन 4 विधायकों के नामों का खुलासा कर दिया, जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग की है।
इन 4 विधायकों पर गिरी गाज
पार्टी ने आधिकारिक तौर पर निम्नलिखित विधायकों को क्रॉस वोटिंग का दोषी माना है:
शैली चौधरी (नारायणगढ़ विधायक)
मोहम्मद इलियास (पुन्हाना विधायक)
मोहम्मद इसराइल (हथीन विधायक)
रेनू बाला (सढ़ौरा विधायक)
प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक को रिपोर्ट सौंप दी गई है और इन सभी को आज ही 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि इनमें से शैली चौधरी और रेनू बाला को कुमारी सैलजा का करीबी माना जाता है।
हुड्डा ने खत्म कराया विधायकों का धरना
इससे पहले चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यालय के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। सिरसा विधायक गोकुल सेतिया और नांगल चौधरी विधायक मंजू चौधरी इस बात से नाराज होकर धरने पर बैठ गए थे कि वोट रद्द होने की अफवाहों में उनके नाम उछाले जा रहे हैं। मामला बढ़ता देख नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद मौके पर पहुंचे और दोनों विधायकों का हाथ पकड़कर उन्हें धरने से उठाया और अपने साथ विधानसभा ले गए।
विधायकों ने दी सफाई-"नोटिस मिला तो देंगे जवाब"
आरोपों के घेरे में आए विधायकों ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।मोहम्मद इसराइल ने कहा कि उन्होंने हुड्डा साहब को अपना वोट दिखाया था और आरोप निराधार हैं।रेणु बाला का कहना है कि उन्होंने प्रभारी की मौजूदगी में वोट डाला और वे कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ी हैं। वहीं, बादली विधायक कुलदीप वत्स ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "कांग्रेस में काम करने वालों की कदर नहीं होती, डुबाने वालों की पूछ है। पार्टी में रहूँगा या नहीं, यह वक्त बताएगा।"
नांदल ने किया कोर्ट जाने का ऐलान
हार झेलने वाले निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने कानूनी लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बेनीवाल का वोट रद्द होना चाहिए क्योंकि वोटिंग के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नियमों का उल्लंघन करते हुए उनके वोट को छूने का प्रयास किया था। नांदल अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक विश्लेषक दीपक शर्मा के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान के लिए यह स्थिति "हेड यू लूज, टेल्स यू लूज" जैसी है। अगर पार्टी सख्त कार्रवाई (निष्कासन) करती है, तो संगठन टूटने का डर है, और अगर नरमी बरतती है, तो नेतृत्व की कमजोरी का संदेश जाएगा।
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