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Delhi Government: दिल्ली सरकार ने AAP कार्यकाल के दैरान केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ दर्ज केसों को खत्म करने का फैसला लिया है।

Delhi Government: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि भाजपा सरकार ने  पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल में केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को खत्म करने का फैसला लिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस फैसले के पीछे की वजह  केंद्र और राज्य सरकार के संबंधों को और बेहतर की एक कोशिश है। इसके अलावा यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इन केसों को खत्म करने के कोर्ट जल्द सुनवाई करें।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली सरकार के अधिकारियों की तरफ से रेखा गुप्ता के इस फैसले को लेकर 9 फरवरी को जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक स्थिरता लाना और  केंद्र सरकार के साथ अच्छे संबंध बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।

फरवरी 2025 में विधानसभा चुनावों के परिणाम सामने आए थे, जिसमें भाजपा सरकार की जीत हुई थी। सरकार बनने के बाद पिछली सरकार के कार्यों, नीतियों और फैसलों की समीक्षा की गई तो पता चला कि प्रशासनिक अधिकारियों, केंद्र सरकार और उपराज्यपाल के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए हैं। 

कौन से मुद्दों पर दर्ज थे केस?

AAP सरकार द्वारा दर्ज केस कई अहम प्रशासनिक और नीतिगत विवादों से जुड़े थे, जिनमें मुख्य तौर पर यह शामिल है:

  • दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़ा विवाद। 
  • सेवा संबंधी मामलों में नियंत्रण को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच टकराव। 
  • प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के क्रियान्वयन पर मतभेद। 
  • दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के लिए वित्तपोषण और बजटीय अधिकारों का विवाद। 

AAP और उपराज्यपाल के बीच तनाव

दिल्ली दंगा मामले में वकीलों की नियुक्ति का प्रश्न और यमुना नदी प्रदूषण से निपटने के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन पर असहमति के मामले में केस दर्ज किया गया था, जिसकी वजह से आप AAP सरकार और उपराज्यपाल के बीच लंबे वक्त तक तनाव  की स्थिति बनी रही थी।  

दिल्ली सरकार के विधि विभाग ने भाजपा के सत्ता में आते ही, इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। प्रक्रिया के तहत संबंधित अदालतों में आवेदन दाखिल कर जल्द सुनवाई और मामलों को खत्म करने का अनुरोध किया था। सरकार का कहना था कि इन मुकदमों को जारी रखने से प्रशासनिक ऊर्जा और संसाधनों की बेवजह खपत हो रही थी। 

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