Rajpal Yadav: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के लिए मुश्किल वक्त में अभिनेता सोनू सूद मददगार बनकर सामने आए हैं। ₹9 करोड़ के कर्ज और चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में सरेंडर करने से ठीक पहले राजपाल ने अपनी आर्थिक बदहाली को लेकर भावुक बयान दिया था, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
इसके बाद सोनू सूद ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन करते हुए उन्हें अपनी आने वाली फिल्म में काम देने की घोषणा की।
सोनू सूद ने की मदद
सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के जरिए राजपाल यादव का सपोर्ट किया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा- "राजपाल यादव एक प्रतिभाशाली अभिनेता हैं जिन्होंने वर्षों तक हमारे उद्योग को अविस्मरणीय योगदान दिया है। कभी-कभी जीवन अन्यायपूर्ण हो जाता है, प्रतिभा की वजह से नहीं, बल्कि समय के क्रूर होने की वजह से। वह मेरी फिल्म का हिस्सा होंगे, और मेरा मानना है कि यह हम सभी के लिए- निर्माताओं, निर्देशकों, सहकर्मियों – के लिए एकजुट होने का समय है।"
Rajpal Yadav is a gifted actor who has given years of unforgettable work to our industry. Sometimes life turns unfair, not because of talent, but because timing can be brutal. He will be part of my film, and I believe this is the moment for all of us..producers, directors,…
— sonu sood (@SonuSood) February 10, 2026
उन्होंने आगे लिखा- "भविष्य के कार्यों के बदले समायोजित की जाने वाली एक छोटी सी साइनिंग राशि दान नहीं, बल्कि सम्मान है। जब हमारे अपने किसी व्यक्ति को कठिन दौर से गुजरना पड़ता है, तो उद्योग को उसे यह याद दिलाना चाहिए कि वह अकेला नहीं है। इसी तरह हम यह दिखा सकते हैं कि हम सिर्फ एक उद्योग से कहीं अधिक हैं।"
आर्थिक तंगी से जुग रहे राजपाल यादव, नहीं चुका पाए कर्ज
राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण से पहले मीडिया से बातचीत में अपनी मजबूरी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि उनके पास कर्ज चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं और उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने इंडस्ट्री के दोस्तों से मदद क्यों नहीं मांगी, तो उनका जवाब था कि इस दौर में हर कोई अकेला होता है और उन्हें इस संकट से खुद ही जूझना होगा।
क्या है पूरा मामला
राजपाल यादव की कानूनी परेशानी की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब उन्होंने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद कर्ज चुकाने में दिक्कतें आने लगीं। भुगतान के लिए दिए गए कई चेक बाउंस होने पर मामला कोर्ट तक पहुंचा।
2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया और छह महीने की सजा सुनाई। बाद में सेशंस कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। समय-समय पर कोर्ट ने राहत दी और भुगतान के लिए मौके भी दिए, लेकिन तय समयसीमा में पूरी रकम जमा न हो पाने के कारण मामला और गंभीर होता चला गया।
फरवरी 2026 में अदालत ने साफ कहा कि बार-बार राहत नहीं दी जा सकती और राजपाल को आत्मसमर्पण का आदेश दिया। आखिरी समय पर दी गई मोहलत की अर्जी भी खारिज हो गई, जिसके बाद 5 फरवरी 2026 को उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।








