Delhi Jal Board: दिल्ली जल बोर्ड ने पानी की बर्बादी और चोरी पर रोक लगाने के लिए मॉडर्न इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, अल्ट्रासोनिक फ्लोमीटर लगाने का फैसला लिया गया है।

Delhi Jal Board: राजधानी में पानी की चोरी और बर्बादी पर रोक लगाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा एक नई पहल की शुरूआत की जा रही है। इस पहल के तहत शहर की बड़ी पानी की पाइपलाइनों पर मॉडर्न इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और अल्ट्रासोनिक फ्लोमीटर लगाए जाएंगे।

ये हाई-टेक फ्लोमीटर पाइपलाइन में लीकेज या चोरी होने के कारण प्रेशर या फ्लो में कमी हो जाने की स्थिति में कंट्रोल रूम को अलर्ट करेंगे, इससे समस्या की तुरंत जांच हो सकेगी, इसे ठीक किया जा सकेगा।  

फ्लोमीटर लगाने के लिए करोड़ों खर्च होंगे

फ्लोमीटर लगाने के लिए करीब 13 करोड़ रुपये खर्च हो सकेंगे। DJB ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लोमीटर लगाने के लिए पहले ही 25 से ज्यादा जगहों का चुनाव कर लिया है। इन पाइपलाइनों का डायमीटर 50 mm से 600 mm तक होगा। वहीं कुछ जगहों पर अल्ट्रासोनिक फ्लोमीटर को भी लगाया जाएगा। इसके अलावा पहले से लगे लेकिन खराब फ्लोमीटर की मरम्मत का काम भी किया जाएगा, जिसमें बैटरी और दूसरे पार्ट्स भी बदले जाएंगे।  

टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई

फ्लोमीटर लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया को भी शुरू कर दिया गया है, जिसमें अनुभवी कंपनियों को बुलाया गया है। फ्लोमीटर लगाने के अलावा, चुनी गई कंपनी 5 साल तक उनका मेंटेनेंस और रिपेयर भी करेगी, ताकि किसी तरह की   टेक्निकल समस्या नहीं होगी।

वहीं हैदरपुर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में एक मिनी कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा। यहां से SCADA सिस्टम के माध्यम से सभी बड़ी लाइनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी की जाएगी, फ्लो कम होने पर संबंधित एरिया के अधिकारियों को बताकर एक्शन लिया जाएगा।  

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पहले भी लगाए थे फ्लोमीटर

बता दें कि पहले भी DJB ने बड़े पैमाने पर फ्लोमीटर लगाए थे, लेकिन कुछ फेल हो गए थे। अब, मेंटेनेंस पर ध्यान देकर, इसे एक परमानेंट सॉल्यूशन के तौर पर स्थापित किया जाएगा, जिससे सप्लाई बेहतर बनेगी और रिसोर्स का भी सही इस्तेमाल होगा।

मौजूदा सरकार भी पानी को बचाने के लिए कदम उठा रही है, जिसमें  पानी के टैंकरों में GPS सिस्टम लगाकर लोकेशन ट्रैक करना, वहीं नॉन-रेवेन्यू वॉटर  (ऐसा पानी जिससे रेवेन्यू नहीं मिलता) को कम करना है, जिसका उद्देश्य पानी के नुकसान को 10 प्रतिशत कम करना है।  

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