Delhi High Court: दिल्ली सरकार के हालिया फीस रेगुलेशन एक्ट को प्राइवेट स्कूलों ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। बताया जा रहा है कि फीस रेगुलेशन एक्ट से जुड़ी याचिका पर हाईकोर्ट 18 अप्रैल को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अदालत मामले को एक ही बार में निपटाना चाहती है, ऐसे में इस मामले पर 18 अप्रैल को होगी।
मामले को लेकर दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में तत्काल सुनवाई करना जरूरी है, क्योंकि कुछ स्कूल फीस का भुगतान नहीं करने के कारण स्टूडेंट्स को निकाल रहे हैं। इसे लेकर बेंच ने कहा है कि उसने प्राइवेट स्कूलों को आगामी अकादमिक सेशन के लिए 'स्कूल-स्तरीय फीस रेगुलेशन कमिटी' गठित करने के आदेश के अमल को पहले ही स्थगित कर दिया है।
हालांकि, बेंच का यह भी कहना है कि इन याचिकाओं का जितना जल्दी हो निपटारा किया जाएगा। सरकार के वकील ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ स्कूल न्यायिक आदेशों का उल्लंघन करते हुए फीस बढ़ा रहे हैं।
स्कूलों संगठन ने की आलोचना
'एक्शन कमिटी अनऐडेड रिकग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स' और 'फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स' जैसे कई स्कूल संगठनों ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण, मनमाना और द्वेषपूर्ण है। बता दें कि इस अधिनियम को 14 अगस्त 2025 को अधिसूचित किया गया था और 10 दिसंबर 2025 से इसे लागू किया गया था।
प्राइवेट स्कूलों ने क्या तर्क दिया ?
प्राइवेट स्कूलों का तर्क है कि 'फीस रेगुलेशन एक्ट' उनकी प्रशासनिक स्वायत्तता छीन लेगा, जिससे वे अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार फीस संरचना तय करने में असमर्थ हो जाएंगे। हाई कोर्ट इस मामले पर हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को सुनवाई की जा रही है, अब अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।