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Delhi Excise Policy Case: दिल्ली आबकारी मामले में सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल की उस मांग पर जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा को मामले की सुनवाई से अलग करने की अपील की है।

Delhi Excise Policy Case: दिल्ली के आबकारी नीति मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में CBI ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और चार अन्य आरोपियों की उस मांग का विरोध किया है, जिसमें जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा को मामले की सुनवाई से अलग करने की अपील की है।

लेकिन CBI का हलफनामे में कहना है कि जस्टिस शर्मा पर वैचारिक पक्षपात का आरोप लगाना बिल्कुल गलत है। याचिकाकर्ताओं द्वारा यह दावा किया गया है कि जस्टिस शर्मा का झुकाव अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) की ओर है, जो कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की कानूनी इकाई मानी जाती है।

इसे लेकर CBI ने कोर्ट से कहा कि किसी जज का किसी कानूनी सेमिनार में शामिल होना इस बात का सबूत नहीं है, वह किसी विचारधारा से प्रभावित हैं। केवल इस आधार पर जज पर पक्षपात का आरोप लगाना गलत है। ऐसा करना न्यायपालिका की गरिमा को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया में दखल देना है, जिसे कोर्ट की अवमानना भी माना जा सकता है। 

CBI ने अपने हलफनामे में क्या कहा ?

CBI ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि ' ABAP के किसी कार्यक्रम में शामिल होना ही वैचारिक झुकाव का प्रमाण मान लिया जाए, तो देश के कई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों को उन मामलों से खुद को अलग करना पड़ेगा, जिनमें राजनीतिक रूप से चर्चित लोग आरोपी हैं।' CBI ने यह भी कहा कि जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने आबकारी नीति मामले में कुछ आरोपियों के पक्ष में भी आदेश दिए हैं, ऐसे में यह कहना कि वे किसी एक पक्ष के प्रति झुकी हुई हैं, यह गलत है।  

 सुनवाई में जल्दबाजी के आरोपों पर CBI ने क्या कहा ?

सीबीआई ने सुनवाई में जल्दबाजी के आरोपों को लेकर भी असहमति जताई है। एजेंसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देश दिया गया है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी सी की जानी चाहिए। ऐसे में कोर्ट द्वारा मामले को जल्दी सुनना किसी तरह का पक्षपात नहीं माना जा सकता है।

सीबीआई ने उदाहरण देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े एक मामले की सुनवाई भी जस्टिस शर्मा द्वारा की जा रही है, इस मामले में अब तक 3 महीने में  27 बार सुनवाई हो चुकी है।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल समेत मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर,अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायत ने जस्टिस शर्मा को मामले से हटाने की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किए हैं। 3 दिन पहले यानी 6 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल भी दिल्ली हाईकोर्ट में शामिल हुए थे, और उन्होंने रेक्यूजल याचिका पर दी थीं। केजरीवाल ने यह भी कहा था कि वह रेक्यूजल याचिका पर खुद अदालत में बहस करेंगे।

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