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यह मामला 18 सरकारी विभागों के करीब 590 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है, जिसे फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर फर्जी कंपनियों और शेयर बाजार में डायवर्ट कर दिया गया था।

हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक ढांचे में एक और बड़ी सर्जरी की है। सरकार ने प्रदेश के दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों में हालांकि निलंबन के स्पष्ट कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसे बहुचर्चित IDFC बैंक धोखाधड़ी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। 

ये अधिकारी हुए हैं निलंबित 
निलंबित होने वाले अधिकारियों में वर्ष 2011 बैच के प्रदीप कुमार-I और 2012 बैच के राम कुमार सिंह शामिल हैं। प्रदीप कुमार-I वर्तमान में राज्य परिवहन विभाग के निदेशक और विशेष सचिव के रूप में कार्यरत थे, जबकि राम कुमार सिंह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव होने के साथ-साथ पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का जिम्मा भी संभाल रहे थे। मुख्य सचिव कार्यालय के अनुसार दोनों अधिकारियों पर ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स, 1969 के तहत यह कार्रवाई की गई है और निलंबन के दौरान इनका मुख्यालय चंडीगढ़ रहेगा। 

तबादले और निलंबन के बीच गहराता कनेक्शन 
इस निलंबन को बुधवार रात हुई 15 IAS अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट का अगला भाग माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि IDFC बैंक घोटाले की जांच जल्द ही CBI को सौंपी जा सकती है, और उससे पहले सरकार उन सभी मोहरों को हटा रही है जिनकी भूमिका संदिग्ध रही है। सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले से राज्य की ब्यूरोक्रेसी में भारी बेचैनी देखी जा रही है। गौरतलब है कि बुधवार रात हुए फेरबदल में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव साकेत कुमार को उनके रसूखदार पद से हटाकर कम महत्व वाले 'अभिलेखागार विभाग' में भेज दिया गया था। इसी तरह पंकज अग्रवाल और डीके बेहरा को भी महत्वपूर्ण महकमों से मुक्त कर दिया गया। चर्चा है कि जब IDFC बैंक में सरकारी विभागों के खाते खोले गए थे, तब ये अधिकारी उन्हीं विभागों के कर्ता-धर्ता थे।

बैंक स्टेटमेंट और विभाग के रिकॉर्ड में करोड़ों रुपयों का अंतर मिला 
यह पूरा मामला सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी से जुड़ा है। हरियाणा के 18 अलग-अलग विभागों ने करीब 590 करोड़ रुपये की धनराशि IDFC बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए दी थी। यह घोटाला तब प्रकाश में आया जब फरवरी 2026 में एक विभाग ने अपना पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने के लिए खाता बंद करने का अनुरोध किया, जिसके बाद बैंक स्टेटमेंट और विभाग के रिकॉर्ड में करोड़ों रुपयों का अंतर मिला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तुरंत मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को सौंपी, जिसमें पता चला कि बैंक मैनेजर रिभव ऋषि ने सरकारी अफसरों के साथ मिलकर पैसा निजी लाभ के लिए डायवर्ट कर दिया था।

दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन और तीन अन्य साइडलाइन 
जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी मैनेजर रिभव ऋषि और उसके सहयोगी अभय ने अपनी पत्नी के नाम पर 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट' नाम की कंपनी बनाकर सरकारी फंड को प्रॉपर्टी और शेयर बाजार में खपा दिया था। अब तक इस मामले में बैंक के छोटे कर्मचारी और मैनेजर ही जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे थे, लेकिन दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन और तीन अन्य को साइडलाइन किए जाने से स्पष्ट हो गया है कि सरकार अब उच्च स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में है। CBI जांच की औपचारिक घोषणा से पहले यह निलंबन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक निर्णायक संकेत माना जा रहा है। 

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