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सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित 7 युवाओं को 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए। सीएम साय के नेतृत्व में पुनर्वास केंद्र उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बन रहा है।

लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर के घने जंगलों की खामोशी अब उम्मीदों की गूँज में बदल रही है। सुकमा के नक्सल पुनर्वास केंद्र में एक ऐसी तस्वीर उभरी, जो न केवल प्रशासनिक सफलता को दर्शाती है, बल्कि उन हाथों के लिए एक नई सुबह का प्रतीक भी है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था। 

छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री आर.एस. विश्वकर्मा ने जब आत्मसमर्पित युवाओं से हाथ मिलाया, तो वह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी। वह एक 'आत्मीय संवाद' था- एक पिता समान बड़े का उन भटके हुए युवाओं को जीवन की राह दिखाने का प्रयास।yभविष्य की नई कनेक्टिविटी
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब 7 आत्मसमर्पित युवाओं के हाथों में अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन सौंपे गए। कल तक जो हाथ दुर्गम पहाड़ियों में बंदूकें संभाले थे आज वही हाथ अब डिजिटल दुनिया से जुड़कर अपने भविष्य की नई कहानी लिखेंगे। ये स्मार्टफोन केवल गैजेट नहीं, बल्कि बाहरी दुनिया से जुड़ने वाली वो खिड़की हैं, जो इन युवाओं को उनके अंधेरे अतीत से निकालकर सूचना और अवसरों के उजाले में ले जाएंगी।

3अपने पैरों पर खड़े हो जाओ
अध्यक्ष आरएस विश्वकर्मा ने युवाओं की आँखों में आँखें डालकर कहा कि, अब आप समाज का हिस्सा हैं। कृषि और स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाएं और अपने पैरों पर खड़े होकर समाज के लिए मिसाल बनें। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर की मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि, शासन केवल आदेश नहीं देता, बल्कि साथ खड़ा होकर संबल भी प्रदान करता है।

बदलाव की बयार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में सुकमा का यह पुनर्वास केंद्र अब केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि 'सपनों का वर्कशॉप' बन गया है। जहाँ कभी अविश्वास की दीवारें थीं, वहाँ अब विकास के पुल बन रहे हैं।

अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य कृष्णा गुप्ता, बलदाऊ राम, यशवंत वर्मा, हरिशंकर यादव, शैलेंद्री परगनिहा, एसडीएम सुकमा सूरज कश्यप, डिप्टी कलेक्टर मधु तेता, डीएसपी मोनिका श्याम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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