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विधानसभा परिसर में ‘मिलेट कैफे’ का शुभारंभ किया गया, जहां 5 से 30 रुपये तक 130 मिलेट व्यंजन उपलब्ध होंगे। इस पहल से किसानों और महिला समूहों को लाभ मिलेगा।

रायपुर। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में मोटे अनाज (मिलेट) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विधानसभा परिसर में ‘मिलेट कैफे’ का शुभारंभ किया गया, जिसका विधिवत उद्घाटन विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने किया। यह कैफे पोषण, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भर किसान और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है।

मिलेट्स को बढ़ावा देने की अनोखी पहल
मिलेट कैफे का उद्देश्य राज्य में मोटे अनाज के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों के भोजन में पौष्टिक विकल्प शामिल करना है। यहाँ लगभग 130 मिलेट आधारित व्यंजन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनमें-

  • रेडी-टू-ईट आइटम
  • गर्म व्यंजन
  • डेजर्ट

शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि सभी मिलेट्स प्रदेश के किसानों से ही खरीदे जाएंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

Vidhansabha Millet cafe
विधानसभा परिसर में मिलेट कैफे का शुभारंभ

कीमतें 5 से 30 रुपये तक
कैफे में व्यंजनों की कीमत न्यूनतम ₹5 से ₹30 तक के रेट रखी गई है, आमजन की क्रय क्षमता को ध्यान में रखते हुए मेन्यू तैयार किया गया है, यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

कई महत्वपूर्ण हस्तियों की उपस्थिति
उद्घाटन अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्वयं कई व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग:

  • छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चंद्राकर
  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल
  • विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा
  • नोडल अधिकारी गजेन्द्र चंद्राकर
  • नाफेड से मनीष शाह
  • बेमेतरा विधायक ईश्वर साहू

इन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को राज्य के पोषण और कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

महिला स्व-सहायता समूह के हाथों संचालन
मिलेट कैफे का संचालन क्षीर सागर स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इससे महिला समूहों को स्वरोजगार, आर्थिक मजबूती और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

पोषणयुक्त और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर कदम
यह कैफे न केवल पौष्टिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाएगा, बल्कि किसानों और महिलाओं के लिए नए अवसर खोलेगा। राज्य सरकार की 'पोषणयुक्त छत्तीसगढ़' और 'आत्मनिर्भर किसान' की सोच को यह प्रयास सुदृढ़ करता है।

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