राजेश दास- जगदलपुर। वर्ष 1990 से वर्तमान तक बीते 36 सालों में नक्सलियों ने सभांग के सुकमा, दंतेवाड़ा व बीजापुर जिले में कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। इन हमलों में 1058 वीर जवानों ने नक्सलवाद के खात्मे व देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इन्हीं वीर जवानों की शहादत से आज नक्सलवाद अतिंम सांसे गिन रहा है और देश को नक्सलदंश से मुक्ति मिल रही है। बस्तर रेंज के अंतर्गत आने वाले सुकमा, दंतेवाड़ा व बीजापुर जिले में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए अब तक कुल 1058 वीर जवानों ने अपना बलिदान दिया है। इनमें सुकमा जिले में सीजी पुलिस के 78 तथा सीआरपीएफ के 108, दंतेवाड़ा जिले में सीजी पुलिस के 208 व सीआरपीएफ के 215 तथा बीजापुर में सर्वाधिक सीजी पुलिस के 329 तथा अर्धसैनिक बलों के 120 कुल 449 जवानों की शहादत इस संघर्ष की गंभीरता और सुरक्षा बलों के समर्पण को दर्शाती है।
इन वीरों के त्याग और कर्तव्यनिष्ठा ने क्षेत्र में आम नागरिकों के जीवन को सुरक्षित बनाने तथा शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। आईजी सुंदरराज पी ने शहीदों की वीरता को नमन करते हुए कहा कि बस्तर रेंज की धरती पर शांति, सुरक्षा और विकास की स्थापना का मार्ग वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान से प्रशस्त हुआ है। दुर्गम जंगलों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और निरंतर सुरक्षा चुनौतियों के बीच हमारे सुरक्षा बलों ने असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। विशेष रूप से सुकमा, दंतेवाड़ा व बीजापुर जैसे क्षेत्रों में लंबे समय तक चली कठिन परिस्थितियों के बीच जवानों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए शांति स्थापित करने के लिए अदम्य साहस दिखाया। दक्षिण बस्तर के इन जिलों के घने जंगल, सीमित संचार साधन, कठिन भौगोलिक स्थितियाँ और माओवादी हिंसा की चुनौतियां लंबे समय तक सुरक्षा बलों के सामने बड़ी परीक्षा बनकर खड़ी रहीं। इसके बावजूद हमारे जवानों ने कभी पीछे हटने का विकल्प नहीं चुना। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस क्षेत्र में कानून का राज स्थापित करने, आम नागरिकों में विश्वास जगाने और विकास की राह खोलने का कार्य किया। यह बलिदान केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए नहीं बल्कि बस्तर के भविष्य को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के
लिए दिया गया है।
ताइमेटला में शहीद हुए थे 76 जवान
सुकमा जिले के ताड़मेटला में ही नक्सलियों ने देश का सबसे बड़ा हमला 6 अप्रेल 2010 को किया था। टीसीओसी के दौरान ताड़मेटला की पहाड़ी जंगल में माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर सीआरपीएफ 62 वीं वाहिनी की कंपनी डिप्टी कमाण्डेट सत्यवान के नेतृत्व में 4 से 7 अप्रैल तक एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया था। अभियान के दौरान दिनांक 6 की सुबह लगभग 6 बजे घात लगाकर बैठे नक्सलियों द्वारा पुलिस बल पर अंधाधुंध फायरिंग एवं विस्फोट किया गया। तथा बुलेटप्रूफ वाहन को भी विस्फोट कर क्षतिग्रस्त कर दिया जिसमें वाहन चालक शहीद हो गया। इस सबसे बड़े हमले में सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट सत्यवान सहित कुल 76 जवान शहीद हुए तथा 07 जवान घायल हुए थे। सुकमा जिले में तीसरा बड़ा हमला ग्राम मिनपा एवं बुरकापाल के मध्य जंगल पहाड़ी में 21 मार्च 2020 को हुआ था। कैम्प बुरकापाल, चिंतागुफा, दोरनापाल व कोंटा से डीआरजी, एसटीएफ एवं 206 कोबरा की संयुक्त टीम ऑपरेशन के लिए रवाना हुई। दोपहर लगभग एक बजे घात लगाकर बैठे 450-500 सशस्त्र माओवादियों द्वारा पुलिस पार्टी पर तीन और से अंधाधुंध फायरिंग व बमबारी की गई। पुलिस बल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए लगभग 7 घंटे तक जवाबी कार्रवाई कर नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर किया। घटना में कुल 17 जवान शहीद हुए। वहीं मुठभेड़ के दौरान डीआरजी एवं एसटीएफ के कुल 15 जवान घायल हुए। जवाची कार्रवाई में 3 माओवादियों के मारे जाने की नक्सलियों ने पुष्टि की थी।
एएसपी गिरपुंजे ने दी शहादत
सुकमा जिले को नक्सलमुक्त करने में सैकड़ों अधिकारियों व जवानों ने अपनी शहादत दी। लगभग दस माह पूर्व 9 जून 2025 को पत्थर खदान में पोकलेन जलाने की सूचना पर एएसपी कोंटा आकाश राव गिरपुंजे के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंची। जली हुई पोकलेन की तस्दीक के दौरान नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर आईईडी में विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में एएसपी आकाश राव गिरपुंजे गंभीर रूप से घायल हो गए तथा एसडीओपी कोंटा भानुप्रताप चन्द्राकर एवं चाना प्रभारी कोटा सोनल ग्याला भी घायल हुए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद एएसपी गिरपुंजे ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पुलिस बल को नक्सलियों की फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब देने लगातार प्रोत्साहित करते रहे। पुलिस की जवाबी कार्रवाई से नक्सली जंगल की ओर भाग गए। इस घटना में गंभीर रूप से घायल एएसपी उपचार के दौरान शहीद हो गए।
थाना प्रभारी कुआकोण्डा विवेक शुक्ला समेत कई जवान शहीद
डोरेपारा जंगल में पुलिस एवं माओवादियों के मध्य मुठभेड़ हुई। पुलिस पार्टी को भारी पड़ता देख माओवादी पीछे भागने लगे उसी दौरान उप निरीक्षक संग्राम सिंग, डोगेन्द्रपाल पात्रे, आरक्षक मुकेश ताती को गोली लगने से घायल हो गये तथा मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से आरक्षक 335 निर्मल नेताम एवं गोपनीय सैनिक सुखराम गावड़े शहीद हो गये। अरनपुर थाना क्षेत्र में 30 अक्टूबर 2018 को नीलावाया सड़क जंगल के बीच अरनपुर क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य (सड़क निर्माण कार्य) को कवरेज करने दिल्ली से दूरदर्शन की टीम आने व उनकी सुरक्षा प्रदाय करने पुलिस पार्टी रवाना हुए थे। इसी दौरान नीलावाया सड़क जंगल के बीच पुलिस एवं माओवादियों के मध्य मुठभेड़ हुई। जवाबी फायरिंग में पुलिस पार्टी को भारी पड़ता देख माओवादी पीछे भाग गये। मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से एसआई रुद्रप्रताप सिंह के अलावा सहायक मंगलू मंडावी एवं राकेश कौशल शहीद हो गये। इस हमले में मीडिया कर्मी अच्युतानंद साहू की भी मृत्यु हो गयी थी।









