गोपी कश्यप- नगरी। ग्राम पंडरीपानी, भीतररास सिहावा स्थित श्री श्रृंगी ऋषि गौशाला, जीव रक्षा सेवा समिति आज केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और धर्म की जीवंत मिसाल बनकर उभर रही है। वर्ष 2006 में 'जियो और जीने दो' के मूल उद्देश्य के साथ स्थापित इस गौशाला ने सैकड़ों बेजुबान पशुओं को नया जीवन देने का कार्य किया है।
11 मार्च 2006 को संस्थापक महेश नाहटा द्वारा स्थापित इस गौशाला को प्रथम अध्यक्ष स्व. कांशी राम साहू ने अपनी 2.5 एकड़ भूमि दान देकर मजबूत आधार दिया। बेजुबान पशुओं के जीवन की रक्षा और सेवा का संकल्प लेकर शुरू हुई यह संस्था आज पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2009 में “यति यत्नलाल अहिंसा एवं गौरक्षा अलंकरण” से भी सम्मानित किया जा चुका है।

हर सुबह सेवा से होती है शुरुआत
समिति के वर्तमान अध्यक्ष प्रिंस गोलछा, कोषाध्यक्ष अनिल वाधवानी, सचिव श्रीमती अनिता गोलछा, डेविड साहू, धनेंद्र ठाकुर, शिवशंकर सोनबोइर, विकास जैन, दानसाय साहू एवं देवीचंद ढेलडिया सहित पूरी टीम प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे से 7:30 बजे तक गौशाला पहुंचकर सैकड़ों गायों की सेवा में जुट जाती है। गायों को कुट्टी-चारा देना, साफ-सफाई, नहलाना, बीमार गायों की देखभाल तथा बछड़ों को दूध पिलाना जैसे कार्य नियमित रूप से सेवा भाव से किए जाते हैं।
सेवा आत्मिक संतोष का अनमोल अनुभव- अध्यक्ष प्रिंस गोलछा
गौशाला परिसर में चर्चा करते हुए अध्यक्ष प्रिंस गोलछा ने कहा कि, सेवा अनेकों प्रकार की की जाती है, लेकिन गौ सेवा करना हमने इसलिए चुना क्योंकि आज जिस प्रकार से इन बेजुबान जानवरों को सताया और काटा जा रहा है। उनके जीवन की रक्षा करना बहुत ही पुण्य का कार्य है। मुझे इस कार्य को करने से जो आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
नगरी के ग्राम पंडरीपानी के श्री श्रृंगी ऋषि गौशाला में जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा के 15 लाख के शेड से गौशाला को संबल मिला है। pic.twitter.com/BKhA5wb9CP
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) April 11, 2026
कोषाध्यक्ष ने दी जानकारी
वहीं कोषाध्यक्ष अनिल वाधवानी ने कहा कि, हम सभी जानते हैं कि हमारे धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि गौमाता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास होता है। गौ सेवा और पूजा से ही 33 करोड़ देवी-देवताओं की आराधना हो जाती है। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि पिछले 8 माह में, मुझे ब्लडप्रेशर की बीमारी थी और व्यवसायिक कार्यों के कारण थकान व तनाव भी रहता था, लेकिन प्रतिदिन सुबह गौशाला में गौ माता की सेवा के बाद शारीरिक, मानसिक और आत्मिक प्रसन्नता मिल रही है, जिसका परिणाम है कि आज ब्लडप्रेशर सामान्य हो गया है और तनाव भी समाप्त हो गया है।

290 से 470 गायों तक का सफर
वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा लगभग 8 माह पूर्व कार्यभार संभालने के समय गौशाला में 290 गायें थीं, जो अब बढ़कर 470 हो चुकी हैं। इनमें से 80 गायों को दुगली क्षेत्र से गौ तस्करी से बचाया गया तथा 33 गायों को कांकेर से सुरक्षित लाया गया। बीमार एवं घायल गायों के उपचार हेतु सभी आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था समिति द्वारा की गई है, वहीं पंडरीपानी निवासी रामकुमार साहू विशेष रूप से बीमार गायों की देखभाल करते हैं। उपचार में सहायता के लिए दिल्ली से 3 काऊ लिफ्टर भी मंगाए गए हैं।
सेवा का मजबूत आधार
गौशाला के संचालन में प्रतिदिन लगभग 10 हजार रुपये का व्यय होता है। गौ सेवा आयोग से प्रति वर्ष 25 लाख रुपये की राशि किश्तों में प्राप्त होती है। दानदाताओं के सहयोग से गौ बरामदा, कमरे और गोदाम का निर्माण कराया गया है। विशेष रूप से अरुण सार्वा द्वारा अपनी निधि से 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित शेड गौशाला के लिए वरदान साबित हुआ है।
तस्करी के खिलाफ आवाज
समिति द्वारा गौ तस्करी रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में कांकेर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नरहरपुर विकासखंड के मुसुरपुट्टा में लगने वाले साप्ताहिक मवेशी बाजार को बंद करने की मांग की गई है, जहां से बड़ी संख्या में गायों को कत्ल के लिए ले जाया जाता है।

सरकार से सहयोग की मांग
समिति के अनुसार सबसे बड़ी समस्या पशु चिकित्सकों और पशु सखियों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना है, जिससे बीमार गायों के उपचार में गंभीर कठिनाइयां आ रही हैं। साथ ही गौ तस्करों द्वारा आए दिन धमकियां मिलने से अनहोनी की आशंका बनी रहती है। समिति ने सरकार से गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने, गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, गौशाला के लिए बाउंड्री वॉल तथा स्थायी पशु चिकित्सक की व्यवस्था करने की मांग की है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
समिति द्वारा वर्तमान में छेना निर्माण किया जा रहा है, जिसे 5 रुपये प्रति नग के दर से बेचा जाता है। इसके साथ ही गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन भी लाई गई है। भविष्य में धूप, अगरबत्ती और गौमूत्र अर्क निर्माण इकाई स्थापित कर गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
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समिति ने समाज के लोगों को दिया संदेश
समिति ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि वे गौशाला में आकर गौ माता की सेवा अवश्य करें, जिससे आत्मा की तृप्ति के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त हो सके और गौ रक्षा का यह पवित्र अभियान और मजबूत बन सके।









