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मंदिर हसौद नगर पालिका की सीएमओ पूजा पिल्ले के विरोध में नपाध्यक्ष पार्षदों और व्यापारियों ने एक दिवसीय धरना दिया।

डागेश यादव- आरंग। मंदिर हसौद नगर पालिका परिषद में सोमवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पूजा पिल्ले की कथित मनमानी और तानाशाही कार्यशैली के खिलाफ पार्षदों, व्यापारी संघ और स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। साथ ही एक दिवसीय हड़ताल और शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया जिसमें पूरा नगर की सभी दुकानें बंद रहीं। 

One-Day Strike and Peaceful Sit-in Protest

सीएमओ पर मानमानी का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि, सीएमओ श्रीमती पिल्ले लंबे समय से जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर रही हैं और कई प्रशासनिक फैसले नियमों के खिलाफ ले रही हैं। इससे नगरवासियों, व्यापारियों और पार्षदों में गहरा असंतोष फैल गया है। पूर्व में भी कई बार शिकायतें और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर पालिका अध्यक्ष गोपाल चतुर्वेदी के नेतृत्व में यह आंदोलन किया गया।

प्रदर्शन के दौरान पार्षदों और नागरिकों ने एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई है- 

  • श्रीमती पूजा पिल्ले के खिलाफ निष्पक्ष जांच शीघ्र कराई जाए।
  • जांच पूरी होने तक उन्हें पद से अलग रखा जाए और अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
  • इससे नगर पालिका के कार्य सुचारू रूप से चल सकें और जांच की निष्पक्षता बनी रहे। 
mandir Hasoud nagar palika
Gyapan

तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान रायपुर कलेक्टर के नाम पर मंदिर हसौद तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा  गया, जिसमें विभिन्न मामला रखा गया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि, बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा, राजस्व हानि और जनप्रतिनिधियों के साथ अमर्यादित व्यवहार जैसे मुद्दों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। अध्यक्ष चतुर्वेदी ने पहले भी फरवरी में कलेक्टर को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने से मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा। 

Memorandum Submitted to the Tehsildar

अध्यक्ष के लगाए आरोप निराधार : सीएमओ
उधर सीएमओ का कहना है कि, पालिकाध्यक्ष के सारे आरोप निराधार हैं। स्वयं परिषद की बैठक को विगत 6 माह से अनावश्यक रूप से टाला जा रहा है। जबकि अनेक बार भाजपा पार्षदगण एवं मेरे द्वारा बैठक की तिथि निर्धारण हेतु उनके समक्ष कई बार नस्ती बढ़ाया जा चुका है। उनकी अरुचि के कारण प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के अभाव में विकास एवं मूलभूत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। रही बात जनप्रतिनिधियों के सम्मान की तो मेरे द्वारा हमेशा आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों से सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाता है।

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