रायपुर। इस वर्ष का पहला चंद्रग्रहण आज दृश्य होगा। सोमवार को होलिका दहन होने के बाद भी ग्रहण के कारण आज रंग नहीं खेला जाएगा। यह एक ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण होगा, जो भारत के कुछ हिस्सों में दिखेगा। चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। ग्रहण का प्रारंभ भारत के किसी स्थान में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चंद्रोदय होने से पूर्व ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा। खग्रास चंद्रग्रहण का मोक्ष भारत के सुदूर पूर्वी भागों में दिखाई देगा। देश के बाकी हिस्सों में खंड चंद्रग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा। तीन मार्च को चंद्रोदय शाम 06:12 बजे पर होगा। तीन मार्च को सूतक प्रातः 09:20 बजे से शाम 06:46 बजे तक रहेगा।
यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा। चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंत रूस, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिंद महासागर में दिखाई देगा। यह ग्रहण सूर्य की राशि सिंह और पूर्वा फागुनी नक्षत्र में लगेगा।
सुख-समृद्धि लाने वाले योग
कई वर्षों बाद होली में धन शक्ति, मालव्य और लक्ष्मी नारायण जैसे अद्भुत योग बन रहे हैं, जो सुख-समृद्धि लाएंगे। सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग और सूर्य-शुक्र की युति से शुक्रादित्य राजयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषाचायों के अनुसार, मालव्य योग और शुक्र मीन राशि में होने से सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। 30 साल बाद शनि का संयोग भी बन रहा है। शनि देव 30 साल बाद अपनी स्वराशि कुंभ में मौजूद रहेंगे। वहीं गुरु का गोचर भी होगा। देवगुरु बृहस्पति 12 साल बाद अपनी स्वराशि मीन में विराजमान होंगे। कुंभ राशि में शनि, सूर्य और बुध की युति से अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
ढंकी जाएंगी देव प्रतिमाएं
सूतक लग जाने पर ईश्वर की मूर्ति को स्पर्श करना, भोजन करना, यात्रा आदि करना वर्जित है। सूतक काल लगते ही मंदिर की देव प्रतिमाओं को कुश के वस्त्रों से ढक दिया जाएगा। देवी-देवताओं को भी रंग बुधवार को ही लगाया जाएगा। हाटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर के पं. सुरेश गिरी गोस्वामी ने कहा, गर्भवती, बच्चे, वृद्ध और रोगी अति आवश्यक होने पर भोजन ले सकते हैं। भोजन सामग्री जैसे दूध, दही, घी इत्यादि में कुश या तुलसी का पत्ता रख देना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के बाद पीने का पानी ताजा ले लेना चाहिए। कुछ आध्यात्मिक उपाय भी इस समय लाभकारी माने जाते हैं। ग्रहण के दौरान ओम नमः शिवाय या इष्ट देव का स्मरण, मंत्र जप और विशेष रूप से चंद्र से संबंधित मंत्रों का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।










