पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि, विशिष्ट पदों पर लंबे समय तक भर्ती लंबित रहना आम जनता के हित में नहीं है। नाराज अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे, सुविधाओं की कमी और विशेषज्ञ पदों पर भर्ती में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की। विशेष रूप से एमडी मनोचिकित्सकों की भर्ती में हो रही सुस्ती पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
पैथोलॉजिस्ट के एक पद पर हो चुका चयन
सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने शपथ पत्र में बताया कि मनोचिकित्सकों की नई भर्ती प्रक्रिया जारी है, जबकि पिछली प्रक्रिया असफल रही थी। 6 एमडी साइकियाट्रिस्ट पदों के लिए प्रस्ताव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भेजा गया था, जो वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा परामर्शदाता और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है, जबकि पैथोलॉजिस्ट के एक पद पर चयन पूरा हो चुका है।
भर्ती को अनावश्यक रूप से खींच रहे
सरकार की ओर से भर्ती में देरी के कारणों में पीजी सीटों की कमी, योग्य विशेषज्ञों का अभाव, कड़े नियम और प्रशिक्षण से जुड़ी अनिवार्य शर्तों का हवाला दिया गया। हालांकि न्याय मित्र ने कोर्ट को बताया कि, पहले ही वित्तीय मंजूरी के बावजूद दोबारा अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू करना भर्ती को अनावश्यक रूप से लंबा खींच रहा है।
किसी भी प्रकार की देरी से बचेगी- कोर्ट
इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि, जब 5 मार्च 2026 को ही प्रस्ताव आगे बढ़ चुका है, तो दोबारा वित्तीय अनुमोदन लेना महज औपचारिकता प्रतीत होता है और इससे अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि, राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करेगी और किसी भी प्रकार की देरी से बचेगी।
आम लोगों के लिए हानिकारक
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि, मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विशेषज्ञ पदों पर भर्ती का लंबित रहना आम लोगों के लिए गंभीर रूप से हानिकारक है। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को पूर्व निर्देशों और भर्ती प्रक्रिया की अपडेट स्थिति के साथ शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की गई है।
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