Tej Pratap Yadav On Samrat Choudhary: बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने सूबे की सियासत में एक नया शिगूफा छोड़ दिया है। पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें उनका पूरा "समर्थन" मिलेगा। तेज प्रताप ने नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अब दिल्ली भागने की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि उनकी शराबबंदी नीति पूरी तरह फेल हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि अब महिलाएं भी अवैध शराब के धंधे में शामिल हैं, जिसे देख नीतीश अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं।
निशांत कुमार पर 'अनुभवहीन' होने का वार
जब राजनीति के गलियारों में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने और सत्ता संभालने की चर्चा हुई, तो तेज प्रताप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि निशांत राजनीति के मामले में बेहद अनुभवहीन हैं। तेज प्रताप के मुताबिक, भले ही निशांत उम्र में उनसे बड़े हों, लेकिन राजनीति में सिर्फ अनुभव और जमीन पर काम मायने रखता है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल निशांत के पास वह राजनीतिक परिपक्वता नहीं है जो एक मुख्यमंत्री या बड़े नेता के पास होनी चाहिए।
छोटे भाई तेजस्वी यादव से तल्खी बरकरार
तेज प्रताप यादव ने न केवल विरोधियों, बल्कि अपने छोटे भाई और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। तेजस्वी द्वारा चलाए जा रहे एनडीए सरकार की 'नाकामियों' के सोशल मीडिया अभियान को तेज प्रताप ने गलत बताया। उन्होंने कहा कि हमें अपने गृह राज्य बिहार के बारे में हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। यही नहीं, तेजस्वी को आरजेडी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वे खुद अपनी पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और अगर तेजस्वी उनसे प्रेरणा ले रहे हैं, तो इसमें उन्हें कोई बुराई नजर नहीं आती।
नई पार्टी के जरिए अपनी राह अलग
आरजेडी से निकाले जाने के बाद अपनी नई पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' बना चुके तेज प्रताप अब बिहार की राजनीति में एक स्वतंत्र धुरी बनने की कोशिश में हैं। सम्राट चौधरी की तारीफ और तेजस्वी के अभियानों की आलोचना यह संकेत दे रही है कि वे आने वाले समय में एनडीए के कुछ नेताओं के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा सकते हैं। हालांकि, उनका यह 'सम्राट प्रेम' और 'नीतीश विरोध' बिहार के राजनीतिक समीकरणों को कितना प्रभावित करेगा, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा।








