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बिहार के मुजफ्फरपुर में भाइयों के झगड़े के बीच बचाव करने आए दिव्यांग भाई की मौत हो गई। बेटे का शव देखकर सदमे में मां ने भी दम तोड़ दिया। एक साथ उठी दो अर्थियों से गांव में मातम।

Muzaffarpur Crime News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ बोचहां थाना क्षेत्र की करणपुर दक्षिणी पंचायत में दो भाइयों के बीच हो रहे विवाद ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया। भाइयों को लड़ता देख बीच-बचाव करने पहुंचे तीसरे भाई की मौत हो गई। इस मौत का सदमा बीमार मां बर्दाश्त नहीं कर सकीं और कुछ ही देर बाद उन्होंने भी प्राण त्याग दिए।

भाइयों के विवाद में मूकबधिर भाई की मौत
यह दर्दनाक घटना वार्ड संख्या 6 की है। जानकारी के अनुसार, चार भाइयों में रामबाबू सहनी (35) सबसे छोटा था और मूकबधिर होने के साथ-साथ दिल का मरीज भी था। घर पर दो भाइयों, चंद्रमणि और मनोज के बीच किसी बात को लेकर जमकर मारपीट शुरू हो गई। रामबाबू अपने भाइयों को लड़ते देख उन्हें शांत कराने पहुंचा, लेकिन इसी खींचतान और धक्का-मुक्की में वह जमीन पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया।

अस्पताल ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम
रामबाबू के बेहोश होते ही घर में अफरा-तफरी मच गई। उसे तुरंत इलाज के लिए बोचहां अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। रामबाबू अपनी बुजुर्ग और बीमार मां पुकारी देवी का बहुत ख्याल रखता था और हमेशा उनके साथ ही रहता था। जैसे ही रामबाबू का शव घर पहुँचा, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।

बेटे का शव देख मां का फटा कलेजा
बुजुर्ग मां पुकारी देवी पहले से ही काफी बीमार थीं। जब उन्होंने अपने जवान बेटे का शव देखा, तो वह यह सदमा सहन नहीं कर पाईं। बेटे की मौत के कुछ ही घंटों बाद मां ने भी दम तोड़ दिया। एक ही घर में मां और बेटे की एक साथ मौत की खबर ने पूरे गांव को सुन्न कर दिया। जिस घर में भाई लड़ रहे थे, वहां अब एक साथ दो अर्थियां सजने लगीं।

गांव में पंचायत और सुलह की कोशिश
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मुखिया प्रतिनिधि सरोज सहनी और अन्य नेताओं की मौजूदगी में गांव में ही पंचायत बुलाई गई। दोनों आरोपी भाइयों को उनकी गलती का अहसास कराया गया और भविष्य में कभी न लड़ने का बॉन्ड भरवाया गया। परिवार और ग्रामीणों की सहमति के बाद मां-बेटे का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।

आपसी कलह ने उजाड़ दिया हसता-खेलता परिवार
रामबाबू की मौत और मां के चले जाने के बाद से दोनों भाई गहरे अफसोस में हैं। गांव वालों का कहना है कि अगर भाइयों ने उस वक्त समझदारी दिखाई होती और आपस में न लड़े होते, तो आज मां और भाई दोनों जिंदा होते। पुलिस भी मौके पर पहुंचकर मामले की छानबीन में जुटी है, हालांकि स्थानीय स्तर पर सुलह के बाद माहौल गमगीन बना हुआ है।

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