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हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि किसी कलाकार की सीट क्यों छीनी गई।

Harivansh Narayan Singh Rajya Sabha nomination: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उच्च सदन का सदस्य मनोनीत किए जाने पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सवाल उठाया है कि एक राजनीतिक व्यक्ति को राष्ट्रपति कोटे से भेजकर कला और संस्कृति जगत की हस्तियों के साथ अन्याय किया गया है।

कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया पेनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और इस फैसले पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरिवंश सिंह पहले एक राजनीतिक दल (JDU) से सांसद थे, ऐसे में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत करना हैरान करने वाला है। राजपूत ने सवाल किया, "क्या यह कला और संस्कृति की विभूतियों के प्रति अन्याय नहीं है? उनके नाम पर किसी कलाकार की राज्यसभा सीट खा गए। उन्हें सदन भेजना ही था तो भाजपा अपने कोटे से भेज देती।"

रंजन गोगोई की जगह सदन पहुंचे हरिवंश
हरिवंश नारायण सिंह को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के रिटायर होने से खाली हुई सीट पर मनोनीत किया गया है। उनका यह नया कार्यकाल साल 2032 तक रहेगा। बता दें कि इससे पहले वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) से दो बार सांसद रह चुके हैं। इस बार जेडीयू से उनकी जगह खुद नीतीश कुमार राज्यसभा पहुंचे हैं।

राष्ट्रपति के मनोनयन का क्या है नियम?
भारतीय संविधान के अनुसार, राज्यसभा में 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। यह सीटें उन लोगों के लिए होती हैं जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान या समाज सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया हो। कांग्रेस का तर्क है कि हरिवंश सिंह एक सक्रिय राजनेता और सदन के उपसभापति रहे हैं, इसलिए उन्हें इस कोटे से भेजना विशेषज्ञों के लिए निर्धारित जगह को भरना है।

पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले हरिवंश नारायण सिंह राजनीति में आने से पहले तीन दशकों तक पत्रकारिता में सक्रिय रहे। वे 'प्रभात खबर' के संपादक और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार भी रह चुके हैं। साल 2014 में जेडीयू ने उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा था। 2018 और 2020 में वे राज्यसभा के उपसभापति चुने गए। 9 अप्रैल को उनका दूसरा कार्यकाल खत्म हुआ और 10 अप्रैल को राष्ट्रपति ने उनके मनोनयन पर मुहर लगा दी।

फिर से उपसभापति बनने की चर्चा तेज
सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद अब सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के उपसभापति बनाए जा सकते हैं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें पद की शपथ दिला दी है। हालांकि, कांग्रेस के विरोध के बाद अब इस मनोनयन को लेकर नैतिक और संवैधानिक बहस छिड़ गई है।

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