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बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी का अहम चेहरा रहे  के.सी. त्यागी ने पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया है।

 Bihar politics बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी का अहम चेहरा रहे  के.सी. त्यागी ने पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में राज्यसभा चुनाव में पार्टी को सफलता मिली थी, जिससे यह घटनाक्रम और भी अहम हो जाता है।

नीतीश कुमार के लिए बड़ा झटका
नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले त्यागी का पार्टी छोड़ना जेडीयू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि वह पार्टी के गठन के समय से जुड़े हुए थे और कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

क्यों छोड़ी पार्टी?
त्यागी ने अपने बयान में साफ किया कि उन्होंने इस बार पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। उनका कहना है कि वह अब भी सामाजिक न्याय, किसानों और वंचित वर्गों के मुद्दों के प्रति पहले की तरह प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Nitish Kumar के प्रति उनका व्यक्तिगत सम्मान बना रहेगा।

लंबा रहा राजनीतिक सफर
2003 में जब समता पार्टी और जनता दल का विलय हुआ, तब से त्यागी जेडीयू के साथ जुड़े रहे। उस समय पार्टी के अध्यक्ष जॉर्ज फर्नांडिस थे। इसके बाद उन्होंने Sharad Yadav और Nitish Kumar के साथ भी काम किया। पार्टी में उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव, मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसी अहम भूमिकाएं निभाईं।

क्या है आगे की योजना?
सियासी हलकों में चर्चा है कि त्यागी जल्द ही किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि उनका फोकस अब बिहार से हटकर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर हो सकता है। उन्होंने खुद भी संकेत दिया है कि 22 मार्च को नई दिल्ली में होने वाली एक बैठक में वह अपने अगले कदम का खुलासा करेंगे।

विचारधारा वही रहेगी
त्यागी ने साफ कहा है कि उनकी राजनीतिक सोच में कोई बदलाव नहीं होगा। वे आगे भी Ram Manohar Lohia, Charan Singh और Karpoori Thakur के विचारों से प्रेरित रहेंगे।

पहले से कम हो रही थी भूमिका
गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछले एक साल से पार्टी में उनकी सक्रियता कम हो गई थी। राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटने के बाद उनके कई बयानों से पार्टी ने दूरी बना ली थी। हाल ही में Nitish Kumar को भारत रत्न देने की उनकी मांग पर भी पार्टी ने आपत्ति जताई थी।

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