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पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने जांच प्रभावित होने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई है।

NEET Student Death Case Patna: पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मुख्य आरोपी और हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को बड़ा झटका लगा है। पॉक्सो (POCSO) के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन ने सोमवार को मनीष रंजन की नियमित जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने 12 पन्नों के विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी का बाहर आना जारी जांच के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

जांच और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
कोर्ट ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना मनीष रंजन के स्वामित्व वाले परिसर (शंभू गर्ल्स हॉस्टल) में हुई है। ऐसे में यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह महत्वपूर्ण गवाहों को डरा सकता है और जब्त किए गए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। न्यायाधीश ने यह भी नोट किया कि मनीष द्वारा दिए गए बयानों में कई विसंगतियां (Contradictions) पाई गई हैं, जो संदेह पैदा करती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अभी है बाकी
सीबीआई (CBI) और एसआईटी (SIT) की दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता के मोबाइल, घटनास्थल और हॉस्टल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसके अलावा, सीबीआई द्वारा मनीष रंजन और हॉस्टल स्टाफ के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोनों की फॉरेंसिक रिपोर्ट का भी इंतजार है। कोर्ट ने माना कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है, इसलिए आरोपी वर्तमान स्थिति में राहत का हकदार नहीं है।

मौत के कारणों पर सस्पेंस बरकरार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि पटना पुलिस और सीबीआई अब तक छात्रा की मौत के सटीक कारणों को स्पष्ट नहीं कर पाई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल में इलाज के दौरान छात्रा के होश में आने की कोई आधिकारिक पुष्टि रिकॉर्ड में नहीं है। ऐसे में कई अनसुलझे सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है।

इन 5 प्रमुख बिंदुओं के आधार पर खारिज हुई जमानत
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करने के पीछे कई तकनीकी और कानूनी कारण गिनाए हैं:

  • घटना के वक्त पूरा परिसर मनीष रंजन के नियंत्रण में था।
  • छात्रा के कमरे से मिली दवाइयां वहां कैसे पहुंचीं और उनके सेवन का सिद्धांत क्या था, इसकी गहन जांच जरूरी है।
  • घटना के समय और परिस्थितियों को लेकर दिए गए बयानों की सत्यता पर संदेह।
  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और एफएसएल (FSL) साक्ष्यों का मिलान अभी प्रक्रिया में है।
  • कई पहलुओं पर सीबीआई की जांच अभी भी जारी है।

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी को वह हॉस्टल में संदिग्ध अवस्था में बेहोश पाई गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 जनवरी को हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, तब से वह न्यायिक हिरासत में है।

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