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असद अख्तर की अजीब नो-बॉल ने सोशल मीडिया पर स्पॉट फिक्सिंग की बहस छेड़ दी। फैंस ने इसकी तुलना मोहम्मद आमिर के 2010 फिक्सिंग कांड से की। फिलहाल कोई आधिकारिक जांच नहीं, लेकिन मामला चर्चा में बना हुआ है।

पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस बार मामला है घरेलू टी20 टूर्नामेंट में खेले गए एक मैच का, जहां एक अजीबोगरीब नो-बॉल ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है। कराची ब्लूज़ के तेज गेंदबाज असद अख्तर ने लाहौर ब्लूज़ के खिलाफ मैच में ऐसी नो-बॉल डाली, जिसे देखकर फैंस को साल 2010 का स्पॉट फिक्सिंग कांड याद आ गया।

14 मार्च को पेशावर में खेले गए इस मुकाबले में असद अख्तर ने एक ओवर में 21 रन लुटा दिए। इस ओवर में उन्होंने दो वाइड और दो नो-बॉल फेंकीं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनकी उस नो-बॉल की हो रही है, जिसमें उनका फ्रंट फुट क्रीज से काफी आगे निकल गया था।

आमिर की नो बॉल की यादें ताजी हुईं
सोशल मीडिया पर इस गेंद की तुलना सीधे मोहम्मद आमिर की 2010 वाली कुख्यात नो-बॉल से की जा रही है, जो बाद में स्पॉट फिक्सिंग का हिस्सा साबित हुई थी। यह मामला सामने आते ही फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स के बीच बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे महज एक गलती बता रहे हैं, तो कुछ इसे संदिग्ध मानते हुए जांच की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच, पाकिस्तान के पूर्व ऑलराउंडर अब्दुल रज्जाक का एक पुराना बयान भी चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने 2010 के स्पॉट फिक्सिंग कांड से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा किया था।

रज्जाक के मुताबिक, उस समय इंग्लैंड दौरे के दौरान एक संयोग से यह साजिश सामने आई थी। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त, जो लंदन में मोबाइल फोन रिपेयर का काम करता था, के पास एक फोन आया। यह फोन मजहर माजिद का था, जो इस पूरे फिक्सिंग नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जाता है।

रज्जाक ने कहा कि जब उनके दोस्त ने फोन ठीक किया, तो उसमें कई मैसेज मिले, जिनमें खिलाड़ियों और मजीद के बीच स्पॉट फिक्सिंग की बातचीत दर्ज थी। इसके बाद यह जानकारी तुरंत टीम तक पहुंचाई गई। उन्होंने आगे बताया कि उस वक्त टीम के सीनियर खिलाड़ी शाहिद अफरीदी को जब इस बारे में पता चला, तो उन्होंने युवा मोहम्मद आमिर को कमरे में बुलाकर सच्चाई पूछी।

रज्जाक के अनुसार, जब आमिर लगातार इनकार करते रहे, तो अफरीदी ने गुस्से में उन्हें थप्पड़ तक मार दिया था। बाद में यह पूरा मामला सामने आया और इसमें कई बड़े नाम फंस गए। 2010 के उस कांड में सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर दोषी पाए गए थे, जबकि मझर मजीद को साजिश रचने के लिए जेल भी हुई थी।

अब असद अख्तर की यह नो-बॉल एक बार फिर उसी पुराने जख्म को कुरेद रही है। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक जांच या आरोप नहीं लगा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों ने पाकिस्तान क्रिकेट की छवि पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
 

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