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संपादकीय लेख : पहले ही दिन विपक्ष का हंगामा करना दुर्भाग्यपूर्ण

सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक की, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सभी दलों के साथ बैठक की, दो दिन पहले राज्यसभा के उपसभापति वैंकेया नायडू ने सर्वदलीय बैठक की थी, सभी बैठकों का संदेश यही था कि सत्र में सार्थक बहस हो, सरकार विपक्ष के हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है। इसके बावजूद विपक्ष का हंगामा करना दर्शाता है कि वे संसद चलने देने के प्रति गंभीर नहीं हैं।

संपादकीय लेख : पहले ही दिन विपक्ष का हंगामा करना दुर्भाग्यपूर्ण
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संसद भवन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Haribhoomi Editorial : देश में जारी कोरोना महामारी संकट के बीच संसद के मानसून सत्र का आगाज तो हो गया, लेकिन पहले दिन दोनों सदनों का विपक्षी हंगामे की भेंट चढ़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले दिन सभी औपचारिक कार्यक्रम होते हैं। नए सदस्यों की शपथ होती है, पिछले सत्र के बाद अगर मंत्रिमंडल में नए सदस्य शामिल हुए हैं तो प्रधानमंत्री दोनों सदनों में नए मंत्रियों का परिचय करवाते हैं। दिवंगत सदस्यों के लिए शोक व्यक्त कर श्रद्धांजलि दी जाती है। कुछेक बिल लिस्टेड होते हैं। लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होने के 8 मिनट बाद ही विपक्ष के सांसद नारेबाजी करने लगे। संसद के दोनों सदनों में कोरोना की दूसरी लहर, महंगाई, चीन से जुड़े मामले, पत्रकारों-नेताओं की कथित जासूसी और जनसंख्या नीति के मुद्दे को लेकर हंगामा शुरू हो गया, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा को पहले 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। 2 बजे जब सदन की कार्यवाही जब शुरू हुई तो विपक्ष ने एक बार फिर से हंगामा शुरू कर दिया, जिससे लोकसभा को 3.30 बजे और राज्यसभा को तीन बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इसके बाद कार्यवाही फिर से शुरू हुई लेकिन इस बार भी विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। अंत में दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक की, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सभी दलों के साथ बैठक की, दो दिन पहले राज्यसभा के उपसभापति वैंकेया नायडू ने सर्वदलीय बैठक की थी, सभी बैठकों का संदेश यही था कि सत्र में सार्थक बहस हो, सरकार विपक्ष के हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है। इसके बावजूद विपक्ष का हंगामा करना दर्शाता है कि वे संसद चलने देने के प्रति गंभीर नहीं हैं। विपक्ष को जब हंगामा ही करना है तो आखिर सर्वदलीय बैठक का क्या औचित्य है? हंगामे में सदन के समय की बर्बादी रोकने के लिए लोकसभा और राज्यसभा को नए सिरे से नियम बनाने की जरूरत है। विपक्ष का कहना कि प्रधानमंत्री की मंत्रिपरिषद में एक राज्यमंत्री कथित तौर पर बांग्लादेशी हैं, सरकार की समूची निर्वाचन व नागरिकता प्रणाली पर सवाल उठाना है। पेगासस फोन हैकिंग विवाद पर भी विपक्ष का हंगामा तथ्यों से परे है। मीडिया रिपोर्ट में फोन टैंपिंग की जानकारी संदेहास्पद है। पेगासस सॉफ्टवेयर निर्माता इजरायली कंपनी इस रिपोर्ट को नकार चुकी है।

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी पेगासस फोन टैपिंग मामले को लेकर लोकसभा में कहा कि जासूसी के आरोप गलत हैं। फोन टैपिंग को लेकर सरकार के नियम बेहद सख्त हैं। डाटा का जासूसी से कोई संबंध नहीं है। केवल देशहित व सुरक्षा के मामलों में ही टैपिंग होती है। हमें सरकार पर भरोसा करना चाहिए। विपक्ष के हंगामे के चलते प्रधानमंत्री अपने नए मंत्रियों का लोकसभा व राज्यसभा में सदन से परिचय नहीं करवा पाए, यह परिपाटी ठीक नहीं है। विपक्ष का एकसूत्री एजेंडा हंगामा नहीं होना चाहिए, केवल सुनाना ही मकसद न हो, सवाल पूछें तो जवाब भी सुनने का धैर्य रखें। संसद सत्र के दौरान विपक्ष की भूमिका लंबे समय से 'गैर-जिम्मेदार' रही है। अभी कांग्रेस अधीर रहती है हंगामा के लिए, संसद नहीं चलने देने के लिए, पहले विपक्ष में रहते हुए भाजपा संसद नहीं चलने देती थी। यह सिलसिला बंद होना चाहिए। संसद के जरिये सरकार के फैसलों, नीतियों, योजनाओं आदि का पता देशवासियों को चलता है, विपक्ष सार्थक रहकर, धैर्य रखकर संसद को अधिक उपयोगी बना सकता है, सरकार को जवाबदेह बना सकता है, लेकिन हंगामे से तो विपक्ष संसद की गरिमा को ही नुकसान पहुंचाता है। संसद में चर्चा परिणामकारी हो।

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