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प्रभात कुमार रॉय का लेख : कूटनीतिक कौशल अपनाने का वक्त

क्वाड सम्मेलन पर चीन की बौखलाहट उसकी आधिकारिक प्रतिक्रिया में उभर कर आई है जिसमें कहा गया है कि क्वाड देश वस्तुतः चीन को रणनीतिक निशाना बनाने के लिए कार्यरत है। रूस पहले ही क्वाड के विरुद्ध अपना आक्रोश व्यक्त कर चुका है। फिर शीतयुद्ध के कगार पर खड़े विश्व में नए कूटनीतिक गठबंधन आकार ले रहे हैं। एक ऐतिहासिक दौर गुजरा, जबकि भारत व रूस कूटनीतिक तौर पर एक दूसरे के अत्यंत निकट देश थे और अमेरिका वस्तुतः सैन्य तौर पर पाकिस्तान के साथ खड़ा था।

प्रभात कुमार रॉय का लेख : कूटनीतिक कौशल अपनाने का वक्त
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

क्वाड देशों का शिखर सम्मेलन वस्तुतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार दिवसीय अमेरिका यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में अमेरिकी के राष्ट्रपति जो बाइडेन, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने भाग लिया। 24 सितंबर को प्रातः दस बजे प्रारम्भ हुए क्वाड शिखर सम्मेलन में संकल्प व्यक्त किया गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ ही विश्व पटल पर शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए एकजुट होकर क्वाड देश कार्य करेंगे और प्रस्तुत चुनौतियों का संयुक्त तौर पर सामना करेंगे। रणनीतिक नजरिये से अत्यंत महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों की तरफ क्वाड देशों के नेताओं ने साफ संकेत दिया है। नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि क्वाड के चारों जनतांत्रिक देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ ही वैश्विक सुरक्षा के लिए भी कटिबद्ध हैं। क्वाड शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान के हालात पर भी चर्चा हुई।क्वाड सम्मेलन में क्वाड देशों द्वारा संयुक्त प्रयास से निर्मित कोविड वैक्सीन का भी उल्लेख किया गया।

क्वाड सम्मेलन पर चीन की बौखलाहट उसकी आधिकारिक प्रतिक्रिया में उभर कर आई है जिसमें कहा गया है कि क्वाड देश वस्तुतः चीन को रणनीतिक निशाना बनाने के लिए कार्यरत है। रूस पहले ही क्वाड के विरुद्ध अपना आक्रोश व्यक्त कर चुका है। फिर शीतयुद्ध के कगार पर खड़े विश्व में नए कूटनीतिक गठबंधन आकार ले रहे हैं। एक ऐतिहासिक दौर गुजरा, जबकि भारत व रूस कूटनीतिक तौर पर एक दूसरे के अत्यंत निकट देश थे और अमेरिका वस्तुतः सैन्य तौर पर पाकिस्तान के साथ खड़ा था। गुट निरपेक्ष भारत ने शीतयुद्ध के विकट दौर में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा था। 1990 में सोवियत संघ के पराभव से शीत युद्ध का समापन हुआ, किंतु चीन के विश्वपटल पर महाशक्ति बन जाने पर विश्व पर शीतयुद्ध के बादल छाने लगे हैं। भारत के लिए कूटनीतिक परीक्षा का दौर प्रारंभ हो चुका है। आजकल रूस और चीन मित्र देश हैं और भारत के साथ रूस के प्रबल कूटनीतिक संबंध हैं। हाल ही में चीन के साथ भारत का सीमा विवाद सुलझाने में रूस की खास भूमिका रही है, जिसे मास्को समझौता करार दिया गया। भारत ने रूस को स्पष्ट तौर बताया कि क्वाड किसी देश के विरुद्ध खड़ा किया गया सैन्य गुट नहीं है। चीन का अनुसरण करते हुए रूस का पाकिस्तान की तरफ झुकते जाना और अफगान तालिबान हुकूमत को मान्यता देने की रूस का इरादा स्पष्ट संकेत दे रहा कि पुराने कूटनीतिक गठबंधन खत्म हो रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन से पहले 06 अक्तूबर 2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में चारों क्ववाड देशों के विदेश मंत्रियों की एक मीटिंग आयोजित की गई थी। वर्ष 2020 में क्वाड प्लस की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें चार क्वाड देशों के साथ ही वियतमान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड ने भी भाग लिया। क्वाड से आशंकित और भयाक्रांत चीन द्वारा बांग्लादेश को धमकी दे डाली कि यदि बांग्लादेश क्वाड में शामिल हुआ तो उसको इसका नतीजा भुगतना होगा। 12 मार्च 2021 को क्वाड देशों के प्रथम शिखर सम्मेलन (वर्चुअल) का भी आयोजन किया जा चुका है। मार्च 2021 में, क्वाड देशों के सम्मेलन के बाद में 'द स्पिरिट ऑफ द क्वाड' शीर्षक से एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें समूह के दृष्टिकोण और उद्देश्यों को रेखांकित किया गया था।

उल्लेखनीय है कि सबसे पहले वर्ष 2004 में प्राकृतिक तबाही सुनामी के वक्त जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पहल सुनामी की भीषण तबाही से जूझने के लिए चारों देश जापान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और भारत एकजुट हुए थे। प्राकृतिक विपदा के विरुद्ध चारों देशों द्वारा इस संयुक्त पहल को अनौपचारिक तौर पर क्वाड का आगाज क़रार दिया गया। वर्ष 2007 में पुनः शिंजो आबे की पहल पर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड, भारत के पीएम मनमोहन सिंह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की निरंतर गति से बढ़ती आक्रमक नौसैनिक गतिविधियों का समुचित प्रतिकार करने और रणनीतिक मुकाबला करने पर सहमत हुए थे। चारों देशों ने हिंद-प्रशांत महासागर में एक संयुक्त नौ सैनिक अभ्यास शुरू करने का निर्णय लिया था। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का नामकरण मालाबार सैन्य अभ्यास किया गया। वर्ष 2007 के पश्चात प्रधानमंत्री केविन रूड के नेतृत्व में आस्ट्रेलिया ने क्वाड से नाता तोड़ लिया और क्वाड मृत प्रायः होकर रह गया। 2017 में फिलीपीन की राजधानी मनीला में आसियान देशों के सम्मेलन में क्वाड को पुनर्जीवन प्रदान किया गया, जबकि आस्ट्रेलिया ने भारत की पहल पर क्वाड में फिर से सक्रिय भागीदारी करने का निर्णय लिया।

वर्ष 2012 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के चीन की राजसत्ता संभाल लेने के बाद दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीनी हुकूमत की विस्तारवादी आक्रमकता में बहुत तेजी आ गई है। भारत के विरुद्ध चीन ने सरहद (एलएसी) पर विस्तारवादी आक्रमकता दिखाई है। पाकिस्तान तो चीन के साथ मिलकर कश्मीर में जेहादी आक्रमता बढ़ाने की साजिशों में निरंतर जुटा हुआ है। अफ़गानिस्तान में सत्तासीन तालिबान भारत के लिए एक नया सिरदर्द बन सकते हैं। चीन ने भारत को चारों तरफ से घेरने के लिए रणनीतिक मोर्चाबंदी जारी रखी है। नेपाल और श्रीलंका इस मोर्चाबंदी के विकट उदाहरण हैं। भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए और चीन की हर आक्रामक रणनीति का माकूल जवाब देने के लिए जापान के साथ मिलकर क्वाड को 2017 में फिर से जिंदा किया और आस्ट्रेलिया को इसमें पुनः शिरकत करने के लिए प्रेरित किया। आजकल सक्रिय क्वाड वस्तुतः भारत की देन है, जोकि एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक विस्तारवाद के विरुद्ध समुचित प्रतिकारी रणनीति है। अमेरिका की क्वाड में शिकरत के कारण रूस सशंकित हो उठा है जिसके साथ उसकी पुश्तैनी शत्रुता रही है। यूक्रेन सकंट के बाद दोनों देश जानी दुश्मन बन गए है। भारत को प्रखर कूटनीतिक कुशलता के साथ रूस से पारंपरिक दोस्ती को बनाए रखना होगा जोकि सदैव वक्त की कसौटी पर खरी उतरी। इतिहास साक्षी है 1962 के चीन-भारत युद्ध में शीतयुद्ध के बावजूद अमेरिका और सोवियत रूस दोनों भारत के पक्ष में खड़े थे। आज भारत को अपनी प्रखर कूटनीति की शानदार विरासत को कायम बनाए रखना होगा। तभी भारत पाक, चीन और तालिबान की संयुक्त सैन्य चुनौतियों का मुंहतोड़ उत्तर देने में सक्षम सिद्ध होगा।

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