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कृष्ण मोहन झा का लेख: सप्तपदी को अपने जीवन में उतारें

इसमें कोई संदेह नहीं कि देश में लाॅकडाउन की 21 दिन की अवधि समाप्त हो जाने के बाद देश में कोरोना संक्रमण के जो आंकडे सामने आ रहे हैं उन्हें देखते हुए लाॅकडाउन की अवधि बढ़ाना अपरिहार्य हो चुका था।

लॉकडाउन को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मॉडल प्रस्तुत करने के दिए आदेशराष्ट्र को संबोधित करते हुए लॉकडाउन का ऐलान करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कोरोनावायरस के संक्रमण काे रोकने के लिए 21 दिन की लाॅकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद यह अनुमान लगाए जा रहे थे कि मोदी सरकार इस लाॅकडाउन को 30 तक जारी तो अवश्य रखेगी परन्तु इस बढ़ी हुई अवधि में कुछ वर्गों लिए रियायतों की घोषणा प्रधानमंत्री अवश्य करेंगे। इसलिए सारे देश की निगाहे 14 अप्रैल को सुबह 10 बजे टीवी स्क्रीन पर लगी हुई थीं। प्रधानमंत्री का संदेश प्रारंभ होते ही देशवासियों के मन में यह उत्सुकता बढ़ने लगी कि क्या प्रधानमंत्री लाॅकडाउन की अवधि बढ़ाने के साथ ही कुछ वर्गों को छूट देने का मन बना चुके हैं। परंतु प्रधानमंत्री ने सारे अनुमानों को गलत साबित करते हुए लाॅकडाउन को न केवल 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा कर दी बल्कि एक सप्ताह तक उसे पहले से भी अधिक सख्ती के साथ सारे लागू करने का भी ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने न तो रेलगाडियों को आंशिक रूप से प्रारंभ करने की घोषणा की, न ही यह कहा कि अब कुछ उद्योगों एवं वाणिज्यिक संस्थान कुछ पाबंदियों के साथ अपना कामकाज प्रारंभ कर सकेंगे। हो सकता है कि 3 मई तक लाॅकडाउन बढ़ाने और अगले एक सप्ताह की अवधि में उसे और अधिक सख्ती के साथ लागू करने के प्रधानमंत्री के फैसले से समाज के कुछ वर्गों के लोग सहमत न हों अथवा वे लाॅकडाउन की बढ़ी हुई अवधि में कोई भी छूट न देने की प्रधानमंत्री की घोषणा से उन्हें निराशा हुई हो परंतु इसमें कोई संदेह नहीं कि देश में लाॅकडाउन की 21 दिन की अवधि समाप्त हो जाने के बाद देश में कोरोना संक्रमण के जो आंकडे सामने आ रहे हैं उन्हें देखते हुए लाॅकडाउन की अवधि बढ़ाना अपरिहार्य हो चुका था। लाॅकडाउन बढ़ाने और अगले एक सप्ताह तक उसे और सख्ती के साथ लागू करने की प्रधानमंत्री की घोषणा से जो थोड़े से लोग असहमत हैं, वे यह क्यों भूल जाते हैं कि देश के सभी मुख्यमंत्रियों और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी एक मत से लाॅकडाउन बढ़ाने का सुझाव दिया था। प्रधानमंत्री की घोषणा के पूर्व ही 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लाॅकडाउन को बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं, पंजाब, उड़ीसा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों के सीएम इसके लिए तैयार थे।

जिस तरह की सख्ती की घोषणा प्रधानमंत्री ने की है। सारे देशवासी आज यह स्वीकार कर रहे हैं कि लाॅकडाउन के फलस्वरूप ही हमारा देश कोरोना वायरस के प्रकोप को नियंत्रित करने में सफल रहा है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत में समय रहते लाॅकडाउन लागू करने के मोदी सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि शीघ्र लाॅकडाउन के कारण ही अमेरिका, इटली, स्पेन और ब्रिटेन जैसी भयावह स्थिति भारत में निर्मित नहीं हो पाई। प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 24 मिनिट के अपने संदेश में सरकार के इस कठोर फैसले से समाज के विभिन्न वर्गों को होने वाली दिक्कतों से सहमत होते कहा कि इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। उन्होने देश के युवा वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे कोरोना वायरस के संक्रमण से मानव जाति की सुरक्षा के लिए कारगर वैक्सीन की खोज करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहें। प्रधानमंत्री ने किसानों और गरीब मजदूरों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उन्हें कोई दिक्कत नहीं होने देगी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के अंत में एक सप्तपदी का अनुपालन करने का देशवासियों से अनुरोध किया। जिसमें उन्होंने सात सुझाव शामिल किए, अपने घर के बुजुर्गों का ध्यान रखें, सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करें, अपने घर में बने मास्क पहनें, आयुष मंत्रालय के निर्देशों को मानेंगे, अपने मोबाइल सेट पर आरोग्य सेतु को अनिवार्य रूप से डाउनलोड करें, गरीब परिवारों की अपने देखरेख करें उन्हें भोजन करवाएं और कोरोना वारियर्स का सम्मान करें। नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर देशवासी को इस सप्तपदी में शामिल सुझावों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। प्रधान मंत्री की इस सप्तपदी में उनके सारे संदेश का सार छिपा हुआ था। अगर हम इसे अपने जीवन में उतारते हैें तो न केवल खुद सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने परिवार, समाज और देश को भी कोरोना से सुरक्षित रख पाएंगे।

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