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देश में स्वाइन फ्लू का बढ़ता कहर, अब तक 585 लोगों की ली जान

देश में स्वाइन फ्लू का संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

देश में स्वाइन फ्लू का बढ़ता कहर, अब तक 585 लोगों की ली जान
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देश में स्वाइन फ्लू का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालात कितने चिंताजनक हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसने इस साल अब तक 585 लोगों की जान ले ली है। आज लगभग सभी राज्य इसकी चपेट में हैं। हालांकि राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश को स्वाइन फ्लू ने बुरी तरह प्रभावित किया है। केंद्र और राज्य सरकारें अपने अपने स्तर पर इसकी रोकथाम के लिए प्रयास कर रही हैं, परंतु स्वाइन फ्लू का वायरस उन सभी तैयारियों को धता बताते हुए तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है। स्वाइन फ्लू का वायरस अमूमन अक्टूबर-नवंबर में लोगों को अपनी चपेट में लेता है, लेकिन इस बार फरवरी में भी इसका असर दिख रहा है। इसी वजह से मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
अफसोस की बात तो यह है कि जिस बीमारी का इलाज संभव है और पिछले कुछ सालों से देश जिसका भुक्तभोगी होता आ रहा है, वह बेकाबू है। ठीक है कि लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य जागरूकता और समझ का अभाव है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक और बीमारी के प्रति सतर्क करने का दायित्व भी तो अंतत: सरकारी स्वास्थ्य मशीनरी पर ही है। वहीं जो मरीज सामने आ रहे हैं, उनकी भी समुचित जांच और इलाज में बाधा आ रही है। स्वाइन फ्लू के लिए एच1एन1 वायरस जिम्मेदार है। यह वायरस पहली बार 1930 में सामने आया था। लंबे समय तक इसके स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इसके विभिन्न स्वरूप सामने आए हैं। जिससे यह और खतरनाक हो गया है। पहली बार यह सुअरों से मनुष्यों में फैला था, परंतु अब इसने मनुष्य से मनुष्य में फैलने की क्षमता विकसित कर ली है। यह मूलत: विदेशी बीमारी है। दूसरे देशों से इसका वायरस भारत पहुंचा और धीरे-धीरे पूरे देश में पैर पसार चुका है।
यह यूं तो आम फ्लू की तरह ही है, जैसे- बुखार आना, ठंड लगना, गला खराब हो जाना, मांसपेशियों व सिर में दर्द होना, खांसी आना आदि लक्षण इस बीमारी के दौरान उभरते हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, यह वायरस शरीर को जकड़ लेता है, जिससे व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। इलाज में देरी होने पर रोगी की मौत भी हो जाती है। ऐसे में सबसे पहली चुनौती शुरुआत में ही इस बीमारी की पहचान करने की होती है। लिहाजा, यदि किसी को सर्दी, जुकाम और बुखार है, शरीर में कई तरह के बदलाव आ रहे हों तो ऐसे व्यक्ति को फौरन जांच करा लेनी चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ, लोगों को भीड़ वाले स्थानों पर जाने से पहले मुंह व नाक पर मास्क या सूती कपड़ा रखने की सलाह देते हैं। चूंकि यह इंसानों के बीच फैलता है इसलिए सारे विश्व के इसकी चपेट में आने का खतरा है।
एच1एन1 के लिए ठंड का मौसम अनुकूल होता है। तापमान जैसे ही बढ़ेगा, इसका असर खत्म होने लगेगा, लेकिन तब तक लोगों के मरने का इंतजार नहीं किया जा सकता है। देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जीडीपी का दो फीसदी से भी कम खर्च किया जाता है, जबकि यहां दुनिया के सबसे गरीब लोगों की एक-तिहाई आबादी रहती है। इस बदहाली के मद्देनजर स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए सरकार को तुरंत युद्ध-स्तर पर सक्रिय होना चाहिए और भविष्य के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।
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