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सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिटफंड घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिटफंड घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इससे लाखों छोटे निवेशकों में न्याय की एक उम्मीद जगी है, जिनकी खून पसीने की कमाई इस घोटाले की भेंट चढ़ गई है। करीब तीन हजार करोड़ रुपये के घोटाले का यह मामला पिछले वर्ष आया था। यह घोटाला पोंजी स्कीम का एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरा था। अभी राज्य प्रशासन की ओर से इसकी जांच हो रही है, परंतु इसके अन्य राज्यों जैसे असम, ओडिशा, झारखंड और त्रिपुरा में फैले होने के कारण पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसी से इसकी जांच की जरूरत महसूस की जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार के विरोध के बावजूद आया है।
ममता बनर्जी पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे इस तरह अपनी पार्टी के नेताओं को बचाने का प्रयास कर रही हैं। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के कईनेताओं पर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगता रहा है। इस मामले में उसके सांसद कुणाल घोष का नाम सामने आने के बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। देश में इस समय चुनावों का माहौल है और अंतिम चरण का मतदान शेष रहा गया है। लिहाजा इससमय ममता बनर्जीके लिए यह आदेश एक बड़े सियासी नुकसान का सबब भी बन सकता है। इस चुनाव में यह घोटाला एक बड़ा मुद्दा रहा है।
आगामी 12 मई को होने वाले चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 में से 17 सीटों पर चुनाव होने हैं और यहां के 24 परगना के दो क्षेत्रों की उन नौ सीटों पर मतदान होने हैं, जहां शारदा घोटाले से सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। यहां तृणमूल को पूर्व में बड़ी जीत मिल चुकी है। शारदा चिटफंड कंपनी के अध्यक्ष सुदीप्त सेन इस घोटाले के मुख्य आरोपी हैं जिन्हें कश्मीर घाटी से गिरफ्तार किया गया था। वे अभी जेल में हैं। आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों से पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया। सैकड़ों निवेशकों ने समूह पर आरोप लगाया था कि ज्यादा लाभ का वादा कर उनसे पैसा लिया गया, जिसे पूरा नहीं किया गया।
घोटाले के खुलासे के बाद जब एजेंटों से निवेशकों ने पैसे मांगने शुरू किये तो कई एजेंटों ने जान तक दे दी। शारदा समूह द्वारा दस लाख से अधिक निवेशकों को ठगने का अनुमान है। वहीं इसके सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की खंडपीठ ने सभी राज्य सरकारों व केंद्र को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को सशक्त बनाने और देशभर में चल रही चिटफंड योजनाओं पर नियंत्रण के लिए भी नोटिस जारी किया था।
कुल मिलाकर निवेशकों में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से एक आस जगी है कि उनका पैसा वापस उन्हें मिल जाएगा। अभी भी करीब 80 फीसदी निवेशकों को पैसे का भुगतान किया जाना बाकी है। परंतु यहां सीबीआई जांच की सफलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अभी भी कई मामले ऐसे हैं, जिसमें सालों बीत जाने के बाद भी न तो जांच पूरी हो सकी है और ना ही चार्जशीट दायर हो पायी है, लिहाज ऐसे मामलों की तय समय सीमा में जांच होनी चाहिए और निवेशकों को त्वरित न्याय मिलना चाहिए।

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