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Editorial : लॉकडाउन पर विवेकपूर्ण फैसला लें राज्य सरकारें

जब कोरोना की दूसरी लहर पूरे देश को तेजी से चपेट में ले रही थी तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि लॉकडाउन अंतिम विकल्प होना चाहिए। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की मारक स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि राज्य सरकारें लॉकडाउन को अनिवार्य या अंतिम विकल्प के तौर पर अपना रही हैं।

Editorial : लॉकडाउन पर विवेकपूर्ण फैसला लें राज्य सरकारें
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : देश में एक तरफ कोविड के नए केस में गिरावट दर्ज की जाने लगी है, वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन का दायरा बढ़ता जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि शनै: शनै: देश फिर से लॉकडाउन की ओर बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे के अंदर देश में 3 लाख 55 हजार 680 लोग संक्रमित पाए गए हैं। 30 अप्रैल के बाद से संक्रमितों की नई संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। 30 अप्रैल को एक दिन में रिकॉर्ड 4.02 लाख संक्रमित मिले थे। पहली बार भारत में एक दिन के अंदर रिकॉर्ड 3.18 लाख लोग रिकवर हुए हैं।

अब तक पूरी दुनिया में एक साथ इतने मरीज ठीक नहीं हुए हैं। ये दोनों ही संकेत हैं कि हालात में सुधार शुरू हो गया है। लेकिन राज्य सरकारों में लॉकडाउन लगाने या बढ़ाने की होड़ सी लगी हुई है। अभी सबसे ताजा बिहार सरकार ने 5 मई से 15 मई तक 15 दिनों का पूर्ण लॉकडाउन लगाया है। उत्तर प्रदेश में जारी साप्ताहिक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। दिल्ली में पहले 19 अप्रैल को 6 दिन का लॉकडाउन लगाया गया था, जिसे 25 अप्रैल से 3 मई तक 7 दिन के लिए बढ़ाया गया, उसके बाद इसे एक सप्ताह और 10 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया।

हरियाणा में 3 मई से 10 मई तक के लिए 7 दिन का पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को 15 मई तक बढ़ा दिया है। पहले एक मई तक ऐसी पाबंदियां थीं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सख्त पाबंदी है। ओडिशा सरकार ने 5 मई से राज्य में 14 दिन का लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है। केरल में पिछले महीने से ही लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाई गई हैं। तमिलनाडु में भी रविवार को पूरी तरह लॉकडाउन रखा गया है। रात्रि कर्फ्यू पूरे राज्य में रात दस बजे से सुबह चार बजे तक लागू है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में लॉकडाउन जैसी सख्त पाबंदियां हैं। राजस्थान में 17 मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। इस तरह देश के अधिकांश राज्यों में टुकड़ों-टुकड़ों में लॉकडाउन है।

हालांकि पिछले महीने के शुरुआत में जब कोरोना की दूसरी लहर पूरे देश को तेजी से चपेट में ले रही थी तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि लॉकडाउन अंतिम विकल्प होना चाहिए। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की मारक स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि राज्य सरकारें लॉकडाउन को अनिवार्य या अंतिम विकल्प के तौर पर अपना रही हैं। वैसे कोरोना के बढ़ते मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि हम केंद्र व राज्य सरकारों से गंभीरता से आग्रह करते हैं कि वे किसी भी तरह की भीड़ एकत्रित होने या बड़े समारोहों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करें। वे आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वायरस की दूसरी लहर के विस्तार पर रोक लगाने के लिए लॉकडाउन पर भी विचार कर सकते हैं।

राज्य सरकारों को चाहिए कि जरूरी हो तो विवेक से अवश्य लॉकडाउन लगाएं। अब सवाल है कि क्या केंद्र सरकार को पूरे देश में पूर्ण लॉकडाउन लगाना चाहिए। इसका जवाब पेचीदा है। चूंकि केस में कमी आनी शुरू हुई है, हो सकता है यह राज्यों में लॉकडाउन का असर हो, लेकिन पिछले इकॉनोमी के हश्र के अनुभव के आधार पर केंद्र को पूर्ण देशबंदी के बारे में बहुत सोच-समझकर विवेकपूर्ण फैसला करना चाहिए, किसी दबाव या भावनात्मक आवेश में नहीं। आवश्यक हो तो जरूर कदम उठाए पर वैक्सीनेशन बढ़ाने, माइक्रो कंटेनमेंट जोन, नाइट कर्फ्यू, दो गज की दूरी, मास्क, राज्यों के कदम आदि ऐसे उपाय हैं, जिनसे भी कोरोना को रोका जा सकता है।

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