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गुप्तचर तंत्र और पार्टी, प्रभु की तरह उनकी लीला निराली है

वह ब्रांड के किसी कोने में ठीक उसी तरह सुस्ता रहे हैं जैसे कभी सृजनहार अपना काम निबटाने के बाद चैन के कुछ पल बिताने अवकाश पर गए थे।

गुप्तचर तंत्र और पार्टी, प्रभु की तरह उनकी लीला निराली है

वह आम आदमी नहीं हैं। आजकल वह छुट्टी पर हैं। मुल्क भर के सारे गोपीचंद गाजर कुतरते हुए उन्हें यहां-वहां तलाश रहे हैं। उनकी थाह पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। हाथों में मैग्नीफाइंग ग्लास थामे राज्य गुप्तचर यह पता लगाने में लगे हैं कि वह पार्टी पराभव का इतिहास रचने के बाद अंतर्ध्‍यान होकर गए कहां हैं। वह इतिहास लेखन का काम अधूरा छोड़ गए हैं। उन्हें अभी उसके कुछ और अध्याय और अनुच्छेद लिखने हैं।

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उनकी पार्टी उन्हें बहुत ‘मिस’ कर रही है और मीडिया उनकी बाइट पाने के लिए मिस कॉल पर मिस कॉल मार रही है। वह ब्रrांड के किसी कोने में ठीक उसी तरह सुस्ता रहे हैं जैसे कभी सृजनहार अपना काम निबटाने के बाद चैन के कुछ पल बिताने अवकाश पर गए थे। प्रभु की तरह उनकी लीला निराली है। वह हर जगह होते हैं, लेकिन वह कहीं नहीं होते। वह कभी गुम नहीं होते इसलिए किसी को मिलते नहीं। वह कभी आंख से ओझल नहीं होते इसलिए दिखते नहीं। वह सृजक हैं, कर्त्ता नहीं। उनकी महिमा अपरम्पार है।

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जासूस उनको पूरी शिद्दत से ढूंढ़ रहे हैं। वे उन्हें हर उस जगह तलाश चुके हैं। जहां वे अकसर पाए जाते रहे हैं। वे उन्हें कैंडी क्रेश से लेकर पोगो तक और पॉपकॉर्न के खाली रैपर से लेकर आइसकैंडी स्टिक तक पर ढूंढ़ चुके हैं। कुछ प्रोएक्टिव जासूस तो उन्हें उनके मनपसंद वीडियोगेम की सीडी और पेनड्राइव तक में खंगाल चुके हैं। उनके होने की भनक तो मिल रही है, लेकिन वह सशरीर नहीं मिल पा रहे। वे कर्त्तव्यनिष्ठ पार्टी कार्यकर्ताओं की स्मृति में मौजूद हैं। वे हींग की महक की तरह उसकी खाली डिब्बी में विद्यमान हैं। वे गायब भी हैं और हाजिर भी, वह मंजर भी हैं नाजिर भी।
उनकी अनुपस्थिति पार्टी को बड़ी खल रही है। वे इतनी बेचैन है कि लगभग रोज ही किसी न किसी मुद्दे को लेकर मार्चपास्ट करती है। पार्टी हांफती हुई अपना खोया हुआ जनाधार नहीं, अपने गुमशुदा नेता को तलाश रही है। वह वापस आयेंगे तो सब कुछ ठीक हो जायेगा। देशहित में पार्टी भले ही खो जाये, लेकिन गुमशुदा जी का मिलना बड़ा जरूरी है। जासूस लोग पूरी कोशिश के बाद भी उनका पता नहीं लगा पा रहे हैं।
इस टेंशन में वे इतनी गाजर कुतर चुके हैं कि आने वाले समय में सब्जीमंडी में उसकी किल्लत हो जाये तो ताज्जुब नहीं। एहतियाती तौर पर जनता से कह दिया गया है कि जब तक जासूस अपने काम पर लगे हैं वे राष्ट्रहित में गाजरों का सेवन स्थगित रखें। जासूसों से कह दिया गया है कि वे निश्चिंत हो कर उनकी तलाश की मुहिम जारी रखें। और किसी को हो या न हो, लेकिन इस मुल्क के गुप्तचर तंत्र, पीपिंग टॉम (मीडिया) और स्वामीभक्तों को उनका अतापता जानने को लेकर बड़ी उत्सुकता है।
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