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पुलवामा आतंकी हमला : इमरान खान के लिए ये रहा सबूतों का गोदाम

से यह बयान पाक के पीएम इमरान खान बहुत पहले भी दे सकते थे और आगामी किसी आतंकी हमले का बैकग्राउंड बनाने के लिए भी दे सकते हैं-भारत सबूत दे तो हम कार्यवाही करें। पाकिस्तान दरअसल सबूतों के एक ऐसा बंद गोदाम है, जहां इस बात का सबूत ही तलाशना मुश्किल है कि पाकिस्तान एक मुल्क भी है। पाक दरसअल अब आतंक का डिपार्टमेंटल स्टोर है।

पुलवामा आतंकी हमला : इमरान खान के लिए ये रहा सबूतों का गोदाम

से यह बयान पाक के पीएम इमरान खान बहुत पहले भी दे सकते थे और आगामी किसी आतंकी हमले का बैकग्राउंड बनाने के लिए भी दे सकते हैं-भारत सबूत दे तो हम कार्यवाही करें। पाकिस्तान दरअसल सबूतों के एक ऐसा बंद गोदाम है, जहां इस बात का सबूत ही तलाशना मुश्किल है कि पाकिस्तान एक मुल्क भी है। पाक दरसअल अब आतंक का डिपार्टमेंटल स्टोर है।

अरब का आतंकी चाहिए जी, बिल्कुल पाक में ओसामा था। भारतीय आतंकी चाहिए, जी बिल्कुल दाऊद इब्राहीम है पाक में, पर जी वैसे वह नहीं है। पर जी है वह पाक में ही। और लोकल आतंकी तो जितने चाहिए लीजिए। फौज की ड्रेस में भी आतंकी हैं। जी जिसे आप पूर्व क्रिकेटर और अभी का पीएम समझ रहे हैं उनके अंदर भी एक आतंकी ही है।

सबूत का तो यह हाल है कि पाक को आज तक मुंबई हमले के सबूत नहीं मिले। पाक को वह सब मिल जाता है, जिसकी पाक को तलाश है। दुनिया भर के आतंकी पाक को मिल जाते हैं, बस आतंकियों के सबूत नहीं मिलते। दुनिया भर में आतंक मचाकर ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में आराम कर रहा था।

अमेरिका को लादेन के पाक में होने के सबूत मिल गए पर पाकिस्तान को नहीं मिले। पाकिस्तान धार्मिक मुल्क है, धर्म के आधार पर बना देश है। वहां सब नेता धार्मिक कामकाज में लगे रहते हैं। धार्मिक काम एक ही है-धर्म आधारित आतंक फैलाना। ओसामा आकर चुपके से सेट हो गया पाक में, वहां किसी के पास सबूत नहीं। पाक सेना और आतंकी गठबंधन की ऐशगाह है।

पब्लिक को छोड़कर यहां सब मजे में हैं। चैनल सुबह-शाम इंडिया को युद्ध में हरा रहे होते हैं। यूं भारतीय चैनल भी चीन पाक को आए दिन हराये रहते हैं। पर भारतीय चैनल ब्रेक लेकर सास बहू पर भी जाते हैं। पाकिस्तान में सेना फुलटाइम सास है और आतंकी फुलटाइम बहू हैं। पाकिस्तान में पब्लिक ही नहीं, पाकिस्तानी भूत, पाकिस्तानी चुड़ैल, पाकिस्तानी नागिन तक अपने भारतीय समकक्षों से ईर्ष्या करती हैं।

भारतीय चुड़ैलों के सीरियल भारत में प्राइम टाइम पर चल रहे हैं। पाकिस्तान में सुबह-शाम तक बस फौज से आतंकी और आतंकी से और बड़े आतंकी, बस यही सब है। पाक में मुल्क होने का सबूत नहीं मिलता, यूं लगता है पूरा देश सेना की चौकी पर खड़ा भीख मांग रहा है। या यूं लग सकता है कि पाक आर्मी पाक बच्चों के स्कूल और राशन को साफ किए जा रही है।

कुछ टुकड़े मीडिया और आतंकियों भी मिल रहे हैं। देश चल रहा है या चलता सा दिख रहा है। पाक सेना ही सब खा रही है। यह बात बहुत पहले पाकिस्तान के जिस हिस्से को समझ आ गयी थी, उसे अब बंगलादेश और 1971 से पहले पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था। बंगलादेश पाकिस्तान से हर बात में आगे निकल गया है।

पाकिस्तान से हटकर पाकिस्तान तक प्रोग्रेस कर जाता है, यह बात पूर्वी पाकिस्तान उर्फ बंगलादेश से समझी जा सकती है। पर पाकिस्तान की नियति पाकिस्तान होना ही है, पाकिस्तान में खुशहाल होना मुश्किल है, क्योंकि खुशहाल होने के लिए या तो आतंकी होना होता है या फौजी। सारी पब्लिक फौजी या आतंकी नहीं हो सकती, इनकी पालकी उठाने के लिए लोग चाहिए।

पाकिस्तान में पब्लिक का सिर्फ इतना यूज है कि वह आर्मी के लिए टैक्स दे और आतंकियों की नेट-प्रेक्टिस के लिए अपने बच्चे दे। पाकिस्तान होकर खुशहाल होना मुश्किल है, यह बात बलोचिस्तान को अब समझ में आ रही है। इसीलिए वो आंदोलन की राह पर चल रहा है। पाक कुछ सालों में इतने हिस्सों में बंट चुका होगा कि 1947 वाले पाकिस्तान के सबूत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। कुल मिलाकर पाकिस्तान गायब सबूतों का मुल्क है।

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