Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

संपादकीय लेख : कोविड केस में कमी सुखद, टीके की गति बढ़ानी जरूरी

377 जिलों में अभी 5 फीसदी से कम मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हर रोज 100 से ज्यादा केस वाले जिलों की संख्या भी कम हो रही है। 257 जिलों में अब 100 से ज्यादा डेली केस रिपोर्ट किए जा रहे हैं। पिछले 8 दिनों से नए केस 2 लाख से कम आ रहे हैं। रिकवरी रेट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अभी यह 93.1 प्रतिशत है।

संपादकीय लेख :  कोविड केस में कमी सुखद, टीके की गति बढ़ानी जरूरी
X

संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : कोरोना की दूसरी लहर के बारे में सकारात्मक संकेत हैं। हर दिन मिलने वाले केस कम हो रहे हैं। रिकवरी रेट बढ़ रही है व टीका लगवाने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। यह सुखद है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगर 7 मई को पीक मानकर डेटा का एनालिसिस करते हैं, तो कोरोना के रोज के केस में 68 फीसदी की गिरावट आई है। 66 प्रतिशत नए मामले 5 राज्यों से आ रहे हैं और बाकी 31 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में। 377 जिलों में अभी 5 फीसदी से कम मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हर रोज 100 से ज्यादा केस वाले जिलों की संख्या भी कम हो रही है। 257 जिलों में अब 100 से ज्यादा डेली केस रिपोर्ट किए जा रहे हैं। पिछले 8 दिनों से नए केस 2 लाख से कम आ रहे हैं। रिकवरी रेट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अभी यह 93.1 प्रतिशत है।

यह दिखाता है कि लोकल लेवल पर वायरस को काबू करने में कामयाबी मिल रही है। कोरोना से होने वाली मौतों की रफ्तार में भी कमी आई है। अवर वर्ल्ड इन डेटा के मुताबिक, भारत में वैक्सीन का कम से कम एक डोज पाने वालों की संख्या 17.2 करोड़ है। इस मामले में हम अमेरिका से आगे निकल गए हैं। इसके अलावा 60 फीसदी से ज्यादा बुजुर्ग आबादी को भी वैक्सीन का कम से कम एक डोज लग चुका है। सबसे बड़ी चिंता है कि अगर तीसरी लहर आई तो कहीं दूसरी लहर की तरह ही अफरातफरी तो नहीं मचेगी। क्योंकि अनुमान जताया गया है कि तीसरी लहर के दौरान बच्चे अधिक प्रभावित होंगे। देश में जितने भी सरकारी व निजी अस्पताल हैं, उसमें बच्चों के इलाज के लिए विशेष सुविधाओं का अभाव है। देश में बच्चों के डॉक्टरों की भी कमी है। इसके साथ ही अभी बच्चों के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है।

भारत में बच्चों के लिए 25 करोड़ डोज की जरूरत होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2 से 18 साल के बच्चों पर कोवैक्सिन और जाइडस की वैक्सीन के ट्रायल किए जा रहे हैं। वैसे ये ट्रायल रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों पर कोवैक्सिन का ट्रायल नरसंहार की तरह होगा। यह तो निश्चित ही है कि सरकार व नियामकों को बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, उस पर किसी प्रकार के मेडिकल ट्रायल से उनके स्वास्थ्य प्रभावित होंगे। हालांकि ब्रिटेन में 12 से 15 साल के बच्चों को फाइजर बायोएनटेक की वैक्सीन को ब्रिटिश ड्रग रेगुलेटर ने मंजूरी दे दी है। इससे पहले ईयू और अमेरिका में इस एज ग्रुप के लिए फाइजर को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी फाइजर की वैक्सीन भारत में बच्चों को लगाई जा सकेगी। लेकिन वैक्सीन के पर्याप्त ट्रायल, सटीकता व कारगर कितना आदि से संबंधित सवाल लोगों के जेहन में तैर रहे हैं। इस पर गुलेरिया कहते हैं कि 'यह पहला मौका नहीं है, जब भारत ने किसी वैक्सीन को बिना ट्रायल के ग्रीन सिग्नल दिया हो। केंद्र ने पहले भी ऐसी वैक्सीन को मंजूरी दी है, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, डब्ल्यूएचओ द्वारा इमरजेंसी यूज की मंजूरी दी जा चुकी है।' ऐसे में हम उम्मीद कर सकते हैं जल्द ही भारत में वयस्कों और बच्चों के लिए एक और वैक्सीन मौजूद होगी। अभी कोरोना की लहर के मंद पड़ने के बावजूद हमें अपने वैक्सीनेशन प्रोग्राम को तेज करना चाहिए, टीके उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए और तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए, ताकि बच्चों पर कोई संकट नहीं आए।

Next Story