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भारत में जासूसी से बाज आए पाकिस्तान

दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम इस एंगल की बारीकी से जांच कर रही है।

भारत में जासूसी से बाज आए पाकिस्तान
नई दिल्ली. भारत के खिलाफ षड़यंत्र में एक बार फिर पाकिस्तान के चेहरे से नकाब उतरा है। वह भारत को नुकसान पहुंचाने की अपनी फितरत को छोड़ नहीं पा रहा है। वह लगातार किसी न किसी तरीके से भारत को दर्द पहुंचाता रहता है। पठानकोट के बाद उरी हमले में पाक के आतंकी संगठनों के हाथ होने के सबूत अभी-अभी दुनिया ने देखे हैं। पाकिस्तानी फौज, आईएसआई व सरकार के इनकार के बावजूद पाक स्थित आतंकी संगठन ने पोस्टर लगाकर उरी हमले में हाथ होने की बात कबूली है। समूचे विश्व ने पाकिस्तान को आतंकवाद को पनाह नहीं देने के लिए चेताया है और उसके खिलाफ सफाई अभियान चलाने को कहा है। उरी हमले के बाद भारत ने सजिर्कल स्ट्राइक कर पीओके के कुछ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया है। जिसे लेकर पाक की हां-ना-हां जारी ही है। लेकिन पाकिस्तान है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।
अब हाईकमीशन से पाक जासूस भारत में रंगेहाथ पकड़ाया है। वह बीएसफ और सेना की बोर्डर पर गतिविधियों की जानकारी व मैप पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई को भेज रहा था। पिछले डेढ साल से ऐसा कर रहा था। दो भारतीयों को भी अपने रैकेट में रिक्रूट कर रखा था। पाक जासूस का भारत में पकड़ा जाना नई बात नहीं है। हर छह महीने-सालभर के अंतराल में कोई न कोई पाक जासूस भारत के किसी न किसी हिस्से से पकड़ाता रहता है। इस वर्ष 28 जनवरी को हरियाणा के अंबाला जिले से आईएसआई एजेंट असलम को पकड़ा गया था। वह पांच साल से भिखारी के वेश में जासूसी कर रहा था। इसी साल 27 अक्टूबर को जैसलमेर से पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत आए पाक जासूस नंदलाल महाराज को अरेस्ट किया गया था। नंदलाल ने कबूला था कि वह भारत में अभी तक 35 किलो आरडीएक्स पहुंचा चुका है।
नंदलाल पाक के खिप्रो सानगढ़ का रहनेवाला है। 30 नवंबर 2015 को यूपी के मेरठ से एजाज नाम के पाक एजेंट को पकड़ा था। वह आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। पिछले साल जैसलमेर के पोखरन और बालोतरा में आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में डाक विभाग के चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। पाक हनी ट्रैप के जरिये भी जासूसी कराता रहा है। लेकिन इस वक्त चिंता की बात यह है कि पाक ने भारत में जासूसी के लिए नई दिल्ली स्थित अपने उच्चायुक्त का इस्तेमाल किया है। किसी भी उच्चायुक्त के कर्मियों को विशेष राजनयिक कवच हासिल रहता है, जिसके चलते उनके खिलाफ पुलिसिया व कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल रहता है। भारत में जासूसी कर रहा पाक उच्चायुक्त का कर्मी महमूद अख्तर को राजनयिक कवच के चलते ही सबूत होने के बावजूद भारत को पूछताछ के बाद उसे छोड़ना पड़ा है। भारत ने पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर अपना विरोध दर्ज करा दिया है। हर बार की तरह इस बार भी पाक हुक्मरान ने जासूसी से इनकार किया है। पर भारत को और भी चौकन्ना रहने की जरूरत है। सीमा पर भी और देश के अंदर भी। पाक अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा। हमारे खुफिया तंत्र को और सतर्क रहना पड़ेगा।
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