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विश्व को फिर से झांसा देने की कोशिश में पाकिस्तान

''आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करो नहीं तो हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएंगे।''

विश्व को फिर से झांसा देने की कोशिश में पाकिस्तान
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर दुनिया को झांसा देने की कोशिश कर रहे हैं। चौतरफा वैश्विक दबाव के बाद पाक के अकेले पड़ जाने के डर को देखते हुए शरीफ सरकार ने पाक के सैन्य नेतृत्व को सख्त चेतावनी दी है कि 'आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करो नहीं तो हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएंगे। 'पाक सरकार अपनी कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई को भी निर्देश देगी कि अगर पाक की कानूनी एजेंसियां आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी तो सेना की इंटेलिजेंस इकाइयां इसमें कोई दखल नहीं देंगी।

लेकिन पाक की जो शासन व्यवस्था है, उसमें पीएम के तौर पर नवाज शरीफ इतने सक्षम हैं कि वह अपने सैन्य नेतृत्व और खुफिया एजेंसी आईएसआई को कोई निर्देश दे सके और ये दोनों उनके निर्देश को मान लें। नहीं। पाक पीएम संवैधानिक रूप से इतने मजबूत होते तो वहां कुकुरमुत्ते की तरह आतंकी गुट पनपते ही नहीं। वहां आतंकी खुलेआम जलसे नहीं कर रहे होते। पाक का लोकतंत्र इतना मजबूत होता तो दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद का प्रयोग उसकी सरकारी नीति नहीं होता।

भारत के अपराधी दाऊद इब्राहिम को पनाह नहीं दिया होता। अमेरिका का वांछित आतंकी ओसामा बिन लादेन वहां से नहीं मिलता। इसलिए पाक पीएम शरीफ का आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए सेना को कहना घड़ियाली आंसू बहाने जैसा है। हकीकत तो यह है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कुछ नहीं करना चाहता है। न ही वहां की सरकार की कोई मंशा है और न ही वहां की सेना व आईएसआई की इच्छा है।

वह केवल दुनिया को फिर से भरमा रहा है। यदि पाक सरकार, पाक सेना व आईएसआई की इच्छा होती तो उसे अपने देश में आतंक के खिलाफ कार्रवाई से कौन रोक रहा है? पाक में 32 से ज्यादा आतंकी गुटों को पनाह कैसे मिले हुए हैं? यूएन से घोषित आतंकी हाफिज सईद, 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड जैश के प्रमुख मसूद अजहर व जकीउर्र रहमान लखवी जैसे आतंकी खुलेआम किसकी सरपरस्ती में छुट्टा घूम रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं?

हक्कानी नेटवर्क, तहरीके तालिबान पाकिस्तान, अलकायदा, लश्करे तैयबा, जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी गुट कैसे पनपे हुए हैं? पाक हुक्मरानों के पास तो आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई की वाजिब वजहें भी हैं, क्योंकि वे कई बार पाक को अपने आतंक से दहला चुके हैं।

ऐसा भी है नहीं कि पाक सरकार को अपने देश के आतंकी ठिकानों के बारे में पता नहीं है। उसे सब पता है। पाक सरकार जब चाहे तक आतंकी ठिकानों व उनके सरगनाओं के खिलाफ एक्शन ले सकती है। इसलिए साफ हो जाता है कि पाक पीएम नवाज शरीफ की सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात बस दिखावे के लिए कह रही है। पाक संसद के संयुक्त सत्र में ही पीपीपी सांसद एतजाज अहसन ने ही नवाज सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए माना कि 'नॉन स्टेट एक्टर्स' को आजादी देने की वजह से पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है।

पीओके में स्थानीय लोग सरकार पर आरोप लगा ही रहे हैं कि वहां आतंकी कैंपों की वजह से उनकी जिंदगी जहन्नूम बन गई है। 2008 में पाक शासक जनरल परवेज मुशर्रफ और भारतीय पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के बीच समझौता हुआ था कि पाक अपनी धरती के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल नहीं होने देगा। पाक दुनिया के अन्य देशों से भी ऐसा ही वादा कर चुका है।संयुक्त राष्ट्र में कह चुका है कि हम आतंकवाद के पीड़ित हैं, इसका खात्मा चाहते हैं और अपनी धरती का इस्तेमाल दूसरे देश में आतंक के लिए नहीं होने देंगे।

अमेरिका, रूस, फ्रांस, र्जमनी, ब्रिटेन, जापान व चीन जैसे शक्तिशाली देश पाक को आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए कह चुके हैं। भारत पाक से लगातार वहां आतंक मिटाने के लिए कहता रहा है, रूस के उफा में भी नवाज शरीफ ने पीएम नरेंद्र मोदी को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। लेकिन क्या हुआ? पाक के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। ऐसे में दुनिया के लिए पाक सरकार के कहे पर भरोसा करना मुश्किल है।

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