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मेक इन इंडिया से विश्व अर्थव्यवस्था को उम्मीदें

2020 के दशक में ग्लोबल ग्रोथ में भारत अगला पावर सेंटर बन सकता है।

मेक इन इंडिया से विश्व अर्थव्यवस्था को उम्मीदें
देश में असहिष्णुता के नाम पर मचे स्यापा के बीच ग्लोबल समुदाय से भारत के लिए अच्छी खबर भी है। इकॉनोमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) के मुख्य अर्थशास्त्री सिमोन बापटिस्ट ने कहा है कि भारत में आर्थिक सुधार सही ट्रैक पर है और बस उसे उड़ान भरने की देर है। 2020 के दशक में ग्लोबल ग्रोथ में भारत अगला पावर सेंटर बन सकता है। भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिहाज से चीन जैसा ही एक मजबूत केंद्र बन सकता है।

सिमोन के मुताबिक, भारत एकमात्र देश है जिसमें 2020 के दशक में दुनिया को उसी प्रकार से बदलने की संभावित क्षमता है जैसा कि चीन ने 2000 के दशक में किया था। सिमोन ने इसके पीछे तर्क दिया है कि भारत सरकार का महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया अभियान देश को ग्लोबल विनिर्माण केंद्र में बदल देगा। दरअसल, ईआईयू ने ग्लोबल बिजली व स्वचालित प्रौद्योगिकी कंपनी एबीबी के लिए भारत की ग्रोथ पॉसिबिलिटी पर एक रिपोर्ट तैयार किया है।

यह रिपोर्ट ख्यात इकॉनोमिस्ट सिमोन बापटिस्ट ने बनाई है। इसमें कहा गया है कि मेक इन इंडिया से भारत के औद्योगिक आधार का बड़े पैमाने पर विस्तार हो सकता है। इस रिपोर्ट में सलाह भी दी गई है कि भारत को अपने बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करनी होगी। सिमोन की रिपोर्ट में इसलिए दम लगता है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम लांच किया था तो चीन सहम गया था और उसने हड़बड़ी में मेक इन चाइना लांच किया था।

दरअसल 2000 के दशक में चीन ने अपने सस्ते मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बन गया। जिससे चीन ग्लोबल मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बनाई और तेजी से ग्रोथ दर्ज किया। लेकिन इस समय चीनी अर्थव्यवस्था संकट में है। चीन नए मांग पैदा नहीं कर पा रहा है। अभी हाल ही में चीन को अपनी मुद्रा युयान का अवमूल्यन करना पड़ा है, फिर भी शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में निवेशकों का भरोसा नहीं लौटा है और चीन अपने निर्यात को नहीं बढ़ा पा रहा है।

चीन के सस्ते मैन्यूफैक्चरिंग हब मॉडल की सबसे बड़ी कमी यह थी कि उसने इसे पूरी तरह एक्सपोर्ट पर ही निर्भर रखा। उसे अपने घरेलू बाजार के अनुरूप नहीं ढाला। चीन के मॉडल में दूसरी कमी यह है, वहां ग्लोबल कंपनियों के लिए अवसर कम है, कड़े कानून और भाषा सबसे बड़ी बाधा है। भारत में ऐसा नहीं है। यहां लोकतंत्र है। अंग्रेजी की स्वीकार्यता है। सस्ते व प्रशिक्षित युवा र्शम है और सरकार के लगातार रिफॉर्म ट्रैक पर रहने से ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए खूब मौके हैं।

भारत की एक खास बात यह भी है कि यहां उसका अपना कंज्यूमर मार्केट भी विशाल है, जहां किसी भी मैन्यूफैक्चरर के लिए सरवाइव करना आसान है। मोदी सरकार ने जिस तरह मेक इन इंडिया के साथ-साथ स्मार्ट सिटी और स्किल इंडिया लांच किया है और विभिन्न क्षेत्र में एफडीआई नियमों को आसान बनाया है व टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता लाई है, इससे भारत का बुनियादी ढांचा सुधरेगा, प्रशिक्षित र्शम बढ़ेगा, जो कि ग्लोबल निवेश के लिए मुफीद होगा। बस सरकार को रिफॉर्म ट्रैक पर ही रहना चाहिए।

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