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कानून व न्याय व्यवस्था का सम्मान करें लालू

रेल मंत्री के पद का दुरुपयोग कर उन पर एक हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति दिल्ली व गुरुग्राम में बनाने का मामला सामने आया है, जिसमें आयकर विभाग जांच कर रहा है।

कानून व न्याय व्यवस्था का सम्मान करें लालू

अगर आप लोकतंत्र में सच्ची आस्था रखते हैं, संविधान में भरोसा रखते हैं, कानून व न्याय व्यवस्था में विश्वास रखते हैं और जांच एजेंसियों पर यकीन करते हैं, तो कानून की खिल्ली उड़ाते हुए उस हिंसक कृत्य और हंगामा के लिए कोई जगह नहीं है, जैसा बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता कर रहे हैं।

राजद कार्यकर्ताओं ने पटना में भाजपा के दफ्तर पर हमला किया, पथराव किया, गाड़ियों को तोड़ा-फोड़ा और पुलिस कर्मियों के साथ हाथापाई की। राजद कार्यकर्ताओं का सरेआम हंगामा और उग्र प्रदर्शन लालू प्रसाद यादव व उनके करीबियों के 22 ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे की कार्रवाई के विरोध में कर रहे हैं।

ये छापे लालू, उनकी बेटी व दामाद और उनके करीबी प्रेमचंद गुप्ता की बेनामी संपत्तियों की जांच के सिलसिले में किए गए हैं। कमाल की बात है कि कार्रवाई आयकर विभाग कर रहा है और लालू राजद के जरिये अपना गुस्सा भाजपा पर निकाल रहे हैं।

इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात बिहार में कानून के राज की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मूक दर्शक बने रहना है। नीतीश कुमार इस पूरे मामले में ठीक वैसे ही बेफिक्र हैं, जैसे रोम जल रहा था और उस समय के इटली के शासक नीरो बंशी बजा रहे थे।

राजद कार्यकर्ताओं ने जिस तरह कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई हैं, उससे न केवल नीतीश कुमार की कथनी व करनी बेनकाब हो गई है, बल्कि ऐसा लगता है कि बिहार में एकबार फिर जंगलराज लौट आया है। लालू प्रसाद यादव पर कितने मामले चल रहे हैं, यह सभी जानते हैं। 800 करोड़ के चारा घोटाला के एक केस में दोषी साबित हो चुके हैं।

उन्हें जेल जाना पड़ा है। उन पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। चारा घोटाला के दो और मामले में आरोपी हैं। एक निजी चैनल के स्टिंग में वे जेल में बंद बाहुबली शहाबुद्दीन से बात करते सुने गए हैं। रेल मंत्री रहे हुए पद का दुरुपयोग कर उन पर एक हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति दिल्ली व गुरुग्राम में बनाने का मामला सामने आया है, जिसमें आयकर विभाग जांच कर रहा है।

उनके बेटे तेज प्रताप पर गलत तरीके से जमीन सौदे के आरोप लगे हैं। अभी आरोपों पर गौर किया जाय तो लालू का पूरा कुनबा ही किसी न किसी आरोप का सामना कर रहे हैं। सीएम के तौर पर नीतीश कुमार को बिहार में कानून का राज कायम कर राजधर्म निभाना होगा।

वे अगर ऐसा नहीं करते हैं तो माना जाएगा कि सत्ता के लिए उन्होंने लालू के हाथ की कठपुतली बनना स्वीकार कर लिया है। नीतीश व लालू के महागठबंधन की जब सरकार बनी थी तो उस समय राजद की ओर से कहा गया था कि लालू यादव सुपर सीएम रहेंगे।

नीतीश को बताना चाहिए कि क्या वाकई में लालू सुपर सीएम हैं? छापे के बाद खुद लालू ने बिना नाम लिए नीतीश पर निशाना साधा कि भाजपा को नया गठबंधन मुबारक। हालांकि राजद ने सफाई दी कि लालू का मतलब आयकर विभाग से है।

लालू यादव को अगर लगता है कि वे बेदाग हैं, तो वे जांच से क्यों बौखलाए हुए हैं? अपने खिलाफ आयकर जांच को राजनीतिक रंग क्यों दे रहे हैं? पद पर रहते हुए गलत करना और उजागर हो तो उसे राजनीतिक साजिश करार देना हमारे देश में अनेक नेताओं का पसंदीदा शगल है। लालू को कानून का सम्मान व न्याय व्यवस्था पर भरोसा करना चाहिए।

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