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योगेश कुमार सोनी का लेख: मलेरिया से भी लड़ाई जरूरी

स्वास्थ्य विभाग ने इसको पूर्ण रुप से खत्म करने के लिए 2027 तक का लक्ष्य रखा है, वहीं इस बीमारी को पूरी दुनिया से खत्म करने लिए दशक पूरा लग जाएगा।

मलेरिया से रोकथाम के लिए कोई कारगर उपाय नहीं, सफाई व्यवस्था भगवान भरोसेThere is no effective solution to prevent malaria in Banderi

गंदगी से पनपे मच्छर से पूरी दुनिया परेशान है। सुनने बेहद आसान लगता है कि मच्छर ने ही तो काटा है, लेकिन पीड़ित होने वालों की संख्या का आंकडा बेहद चौकाने वाला है। इस बीमारी पर काबू पाने के लिए विश्व मलेरिया दिवस हर वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी स्थापना मई 2007 में साठवें विश्व स्वास्थ्य सभा सत्र में रखी थी। मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी से भारत के अलावा दौ सौ से अधिक देश ग्रस्त हैं। 3 अरब 3 करोड जनसंख्या पर हर समय खतरा बना रहता है। वर्ष 2012 में तो इस बीमारी ने पूरे विश्व को अपने शिकंजे में जकड लिया था, अकेले इस ही साल में सवा छह लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा हर वर्ष आंकडा लगभग इसके आस-पास ही रहता है। इस बीमारी से सबसे ज्यादा मरने वालों में हमारा देश चौथे स्थान पर आता है। स्वास्थ्य विभाग ने इसको पूर्ण रुप से खत्म करने के लिए 2027 तक का लक्ष्य रखा है, वहीं इस बीमारी को पूरी दुनिया से खत्म करने लिए दशक पूरा लग जाएगा। यह बीमारी 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेती है। पूरी दुनिया में पिछले दशक भर में भी यह बीमारी हर वर्ष करीब पौने दो करोड़ लोगों को प्रभावित करती है।

हम मलेरिया शब्द को बचपन से सुनते आते हैं तो इसका होना या इससे मानव क्षति का होना हमें ज्यादा गंभीर नही लगता, लेकिन मन में प्रश्न यह है कि आखिर दुनिया के तमाम देशों के अलावा विकासशील देश भी इससे पूर्ण रुप से लड़ने में सफल क्यों नही हो पा रहे हैं। मौजूदा वक्त में पूरी दुनिया को कोरोना जैसे खतरनाक वायरस ने परेशान कर रखा है और इसकी वैक्सीन बनाने में वैज्ञानिक, डॉक्टर व विशेषज्ञ लगे हैं। यह वायरस एक ही समय पर सबको नुकसान पहुंचा रहा है इसलिए इस पर बेहद गंभीरता से सभी लड़ रहे हैं और चूंकि मलेरिया से एक साथ, एक ही जगह पर मौतें नही होती तो यह हमें खतरनाक नही लगता। जिस तरह कोरोना से निपटने के लिए पूरी दुनिया एकजुट होकर उसे हराने में लगी है इस ही प्रकार मलेरिया से भी लड़ने की जरुरत है। भारत के संदर्भ में चर्चा करें तो हर राज्य के नगर निगम में मलेरिया का एक अलग विभाग होता है जो पूरे वर्ष कार्यरत रहता है, लेकिन कर्मचारियों की उपस्थिति केवल बारिश के मौसम में दिखती है चूंकि इसका प्रभाव इन दिनों ज्यादा रहता है। पिछले वर्ष की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिन्दुस्तान में हर वर्ष करीब अठ्ठारह लाख लोग मलेरिया से ग्रस्त होते थे। वैश्विक आंकडों के अनुसार मलेरिया अस्सी प्रतिशत भारत, पाकिस्तान, इथियोपिया व इंडोनेशिया में होता है। मौजूदा केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 में हमारे देश में मलेरिया के 11 लाख मामलें सामने आए थे लेकिन उसके बाद से इनमें लगातार कमी आई है।

बहरहाल, आज हम कोरोना वायरस के रुप में एक अज्ञात शत्रु से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं इसलिए इस ही प्रकार से मलेरिया की गंभीरता को समझते हुए इससे लड़ने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरुरत है। जहां एक ओर शासन-प्रशान इससे लड़ने के लिए काम कर रहा है वहीं जनता को भी स्वयं जागरुक होने की जरुरत है। समय-समय पर इसके लिए जागरुक कार्यक्रम होते रहते हैं। बताया जाता है कि अपने आस-पास कहीं भी पानी इक्कठा न होने दें, लेकिन हम भी ऐसी बातों को हल्के में ले लेते हैं। दरअसल मलेरिया मादा एनाफिलीज नाम के मच्छर के काटने से होता है। यह गंदे पानी में पैदा होता है जो एक्टिव होते ही मनुष्य के पास भागता है और यह मच्छर इंसान को शाम को ही काटता है।

इस आधार पर एक बात तो तय है कि इससे आसानी से लड़ा जा सकता है। यदि हम अपने आसपास गंदा पानी या गंदगी न जमा होने दे तो हम इस जंग से स्वयं भी लड सकते हैं। यदि नदी-नाले दूषित हैं तो उसके लिए हमें खुद को जिम्मेदार मानते हुए ऐसा करने से रोकना होगा साथ ही यदि कुछ जगहों पर आपकी असक्षमता है तो वहां संबंधित विभाग का ध्यान केन्द्रित करवाते हुए वहां स्वच्छ करा सकते हैं। प्रधानमंत्री बनते ही मोदी ने सबसे पहला मिशन सफाई को लेकर ही रखा था। जिसको प्रभाव प्रारंभिकता में तो बेहद शानदार तरीके से देखा गया था, लेकिन बाद में कुछ लोग अपने पुराने ढर्रे पर लौट आए लेकिन अनुशासन का पालन करने वालों की संख्य़ा अभी भी ज्यादा है जिससे पहली की अपेक्षा स्वच्छता पर फर्क देखने को मिलता है। स्पष्ट है कोई भी जंग तभी जीत सकते हैं जिस सेना के राजा से लेकर अंतिम पद का भी सिपाही जी जान से लड़ता है। इसलिए हर किसी को जागरुक होने की जरुरत है जिससे की मलेरिया के साथ बाकी बीमारियों को भी खत्म कर सकें।

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