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डॉ़ एलएस यादव का लेख : एंटी मिसाइल क्षेत्र में आगे बढ़ता भारत

भारत की रक्षा तैयारियां पिछले कुछ दिनों में जल, थल एवं आकाश (Sky) के कई मोर्चों पर तेज हुई हैं। अभी हाल ही में डीआरडीओ के मुख्यालय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम के माॅडल का उद्घाटन किया जिसे राष्ट्रीय तकनीकी उन्नति के क्षेत्र में एक नई मिसाल कहा जाएगा। यह भारत के रक्षा क्षेत्र में उन्नत विकास को दर्शाता है। भारत ने यह अहम सामरिक उपलब्धि हासिल करने के लिए धरती की निचली कक्षा (लोअर अर्थ आर्बिट) में जिस उपग्रह पर निषाना साधा वह उपग्रह माइक्रोसेट-आर था। इस उपग्रह को 24 जनवरी 2019 को श्री हरिकोटा से लाॅन्च किया गया था। यह सब भारत के बढ़ते कदमों को दिखाता है।

डॉ़ एलएस यादव का लेख : एंटी मिसाइल क्षेत्र में आगे बढ़ता भारत
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भारत की रक्षा तैयारियां पिछले कुछ दिनों में जल, थल एवं आकाश के कई मोर्चों पर तेज हुई हैं। ये तैयारियां शत्रु देशों के लिए चेतावनी है कि अगर वे गलत इरादे से कुछ करने का प्रयास करेंगे तो उन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा।

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) लगातार मिसाइलों का परीक्षण करके भारत को रक्षा तकनीक के मामले में लगातार सफलताएं दिला रहा है। अभी हाल ही में डीआरडीओ के मुख्यालय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम के माॅडल का उद्घाटन किया जिसे राष्ट्रीय तकनीकी उन्नति के क्षेत्र में एक नई मिसाल कहा जाएगा। यह भारत के रक्षा क्षेत्र में उन्नत विकास को दर्शाता है।

ये परीक्षण वर्तमान समय में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के भंडार में विभिन्न प्रकार के कई ऐसे मिसाइल (Missile) सिस्टम हैं जिनके लगभग सभी परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में इनके अंतिम सफल परीक्षणों के बाद इन्हें भारतीय सषस्त्र बलों को उपयोगी भूमिका के लिए सौंपा जाना है।

डीआरडीओ के इन प्रयासों से देश के आत्मनिर्भर भारत एवं मेक इन इंडिया अभियान को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ये स्वदेशी हथियार चीन के साथ चल रहे तनाव को दूर करने में मदद करेंगे क्योंकि हथियारों की ताकत ही ऐसी स्थिति को हल करने में सहायक होती है।

इससे पहले भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में अपने पोत गाइडेड मिसाइल कोरवेट आईएनएस कोरा से एक जहाज रोधी मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। नौसेना ने जानकारी दी कि मिसाइल ने अधिकतम दूरी पर स्थित लक्ष्य को सटीकता के साथ ध्वस्त कर दिया गया। नौसेना ने यह कार्य एक अभ्यास के तहत किया जो भारत के नजदीक रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में उसकी तैयारियों को दर्शाता है। आईएनएस कोरा की सेवा के 22 साल पूरे हो चुके हैं। यह एक जंगी तहाज है जिसका इस्तेमाल गाइडेड मिसाइलें दागने में किया जाता है। इसे वर्ष 1988 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इस पर केएच-35 एंटी शिप मिसाइल भी तैनात है। भारतीय नौसेना के पास इस श्रेणी के तीन और जंगी जहाज आईएनएस किर्च, आईएनएस कुलिश एवं आईएनएस करमुक भी हैं जो इसी तरह के हमले करने में सक्षम हैं।

इन्हीं तैयारियों के बीच इससे पहले भारतीय नौसेना ने 23 अक्टूबर को अरब सागर में सैन्य अभ्यास के दौरान एंटी शिप मिसाइल से लक्ष्य पर बेहद सटीक निशाना लगाकर किसी भी सामरिक चुनौती से निपटने के लिए अपनी यौद्धिक तैयारियों कंे पुख्ता होने का संदेश दिया था। इस सैन्य अभ्यास के दौरान नौसेना ने अपने एक पुराने जहाज को गहरे समुद्र में अपनी एंटी शिप मिसाइल के अचूक निशाने से ध्वस्त करके डुबो दिया। नौसेना के अनुसार इस नौसैनिक अभ्यास के दौरान मिसाइल कैरियर युद्धपोत आईएनएस प्रबल ने एक पुराने गोदावरी श्रेणी के डी-कमीशंड जहाज को अरब सागर में निशाना बनाते हुए अधिकतम रेंज के साथ एंटी शिप मिसाइल दागे जिनका निशाना इतना सटीक और जबरदस्त था कि यह जहाज नष्ट होकर समुद्र में डूब गया।

इस नौसैनिक अभ्यास में शामिल आईएनएस गोदावरी स्वदेश में ही बनाया गया युद्धपोत है। गोदावरी श्रेणी का पहला युद्धपोत वर्ष 1983 में शामिल किया गया था। इसके बाद इस श्रेणी के दो युद्धपोत और तैयार किए गए थे। नौसेना के इस अभ्यास के दौरान विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य, दूसरे जहाज, हेलीकाॅप्टर, मिसाइल और विभिन्न प्रकार के अन्य हथियार शामिल किए गए थे। इस अभ्यास से एक दिन पहले नौसेना प्रमुख एडमिरल करमवीर ने नौसेना के अनेक बेस प्रमुखों के साथ नौसेना की सामरिक चुनौतियों के मद्देनजर आपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की थी। चीन से तनाव के चलते यह अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। एलएसी पर तनातनी के मद्देनजर भारतीय नौसेना ने पिछले तीन महीने के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती और आॅपरेशनल तैयारी दोनों में ही काफी इजाफा किया है। भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन कोरवेट आईएनएस प्रबल पर रूस निर्मित केएच-35 उड़ान पोत रोधी मिसाइल तैनात हैं। इस मिसाइल की मारक क्षमता 130 किलोमीटर तक की है। इस स्वदेशी युद्धपोत में रूसी और पश्िचमी आयुध प्रणालियां लगी हुई हैं। कुल मिलाकर भारतीय नौसेना ने हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। भारतीय नौसेना मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था एवं आॅपरेशंस को इसी तरह बनाए रखेगी। इस तरह यह स्पष्ट हो जाता है कि सामुद्रिक क्षेत्र में चीन से निपटने की तैयारियां तेजी से जारी है।

इससे पहले 27 मार्च 2019 को एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। इस सफल परीक्षण के बाद भारत अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के क्लब में शामिल हो गया था। एंटी सैटेलाइट मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद भारत को अंतरिक्ष में मिसाइलों को मार गिराने की क्षमता हासिल हो गई थी। भारत ने यह अहम सामरिक उपलब्धि हासिल करने के लिए धरती की निचली कक्षा (लोअर अर्थ आॅर्बिट) में जिस उपग्रह पर निषाना साधा वह उपग्रह माइक्रोसेट-आर था। इस उपग्रह को 24 जनवरी 2019 को श्री हरिकोटा से लाॅन्च किया गया था। डीआरडीओ ने ओडिशा तट के पास एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप परिसर से एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण करते हुए लगभग 300 किलोमीटर की कक्षा में परिक्रमा कर रहे इस उपग्रह को मार गिराया। यह मिशन शक्ति आॅपरेशन सिर्फ तीन मिनट में पूरा कर लिया गया था।

विदित हो कि पृथ्वी की सतह से 160 से 2000 किलोमीटर के बीच की ऊंचाई को निचली कक्षा कहा जाता है। माइक्रोसेट-आर उपग्रह का निर्माण भी डीआरडीओ द्वारा ही किया गया था। इसे पीएसएलवी सी-44 से लांच किया गया था।

उल्लेखनीय है 2000 किलोमीटर से ऊंचाई से 35786 किलोमीटर की ऊंचाई तक की कक्षा को मीडियम अर्थ आॅर्बिट यानी कि पृथ्वी की मध्यम कक्षा जाता है। 35786 किलोमीटर की ऊंचाई से 42164 किलोमीटर की ऊंचाई तक की कक्षा को जियोसिंक्रोनस आॅर्बिट कहा जाता है। जियोसिंक्रोनस आॅर्बिट से ज्यादा ऊंचाई वाली कक्षाएं हाई अर्थ आॅर्बिट या पृथ्वी की उच्च कक्षाएं होती हैं। लो अर्थ आॅर्बिट में चक्कर लगाने वाले लियो सैटेलाइट कहा जाता है। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि भारत की ये सामरिक तैयारियां किसी भी देश से युद्ध के समय उसे मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सक्षम हो गया है।

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