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मानसून सत्र में जीएसटी समेत अहम बिल पास हों

मोदी सरकार के लिए संसद का मानसून सत्र बेहद अहम

मानसून सत्र में जीएसटी समेत अहम बिल पास हों
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अपने दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी मोदी सरकार के लिए संसद का मानसून सत्र बेहद अहम है। विकास और आर्थिक सुधार के एजेंडे को लागू के लिए जरूरी कई महत्वपूर्ण विधेयक राज्यसभा या लोकसभा में लंबित हैं। ये बिल जितनी जल्दी पास होंगे, विकास योजनाओं और इकॉनोमिक रिफॉर्म को उतनी ही तेजी से गति दी जा सकेगी। सरकार ने इस सत्र के लिए करीब दो दर्जन से अधिक बिलों को अपने एजेंडे में शामिल किया है। इनमें सबसे टॉप पर जीएसटी बिल है। इस बिल को सरकार जल्द से जल्द पास कराना चाहती है। यह लोकसभा में पास है, जबकि राज्यसभा में लंबित है।
दरअसल, इनडायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म की दिशा में मील के पत्थर माने जाने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को सरकार अगले वित्त वर्ष 2017-18 से लागू करना चाहती है। इस लिहाज से चालू वित्त वर्ष में सरकार के पास कुछ ही महीने बचे हैं। इस सत्र के अलावा दो और सत्र ही आगे होंगे। शीत और बजट सत्र। यदि कोई विशेष सत्र आहूत नहीं हो तो। जीएसटी बिल के साथ पेंच है कि यदि यह राज्यसभा में संशोधन के साथ पास हुआ तो इसे फिर लोकसभा से पास कराना होगा। दोनों सदनों से पास होने पर इसे कम से कम 12 राज्यों से भी अनुमोदन कराना होगा। फिर राष्ट्रपति की मुहर के बाद यह लागू हो पाएगा। राज्यों से अनुमोदन में भी वक्त लगेगा। इसलिए सरकार मानसून सत्र में ही इस बिल को पास करा लेना चाहती है, ताकि राज्यों में तकनीकी पेंच नहीं फंसे।
प्रधानमंत्री खुद इस बिल को पास कराने में दिलचस्पी ले रहे हैं। सत्र शुरू होने के एक दिन पहले सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ पीएम ने बैठक की और सभी से देशहित में इस बिल को पास करने में सहयोग देने की अपील भी की। पीएम ने यह भी कहा कि एनडीए इस बिल का र्शेय नहीं लेना चाहता है, बल्कि इसे देश के लिए जरूरी समझ कर सभी साथ दें। इससे निश्चित ही विपक्ष में सकारात्मक संदेश गया है। जीएसटी पर कांग्रेस ने अपना रुख नरम किया है। नहीं तो पीएम नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस ही जीएसटी बिल की राह में रोड़ा अटकाती रही है। कांग्रेस की जिद की वजह से पिछले करीब पांच सत्र व्यर्थ चले गए हैं। इस बिल पर देश ही दुनिया की भी नजर है।
मोदी सरकार ने आर्थिक सुधार को तेज करने के लिए एफडीआई नियमों को जिस तरह उदार बनाया है, उसमें ग्लोबल निवेशकों की नजर भारत के टैक्स रिफॉर्म पर है। यूपीए सरकार के समय पिछली तारीख से रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लाने की कोशिश के चलते वैश्विक निवेशकों में भारत के प्रति नकारात्मक संदेश चला गया था। इसलिए इस सरकार के सामने टैक्स रिफॉर्म के जरिये देश की छवि को निवेश के अनुकूल बनाने की जिम्मेदारी भी है। इसमें जीएसटी बिल अहम रोल अदा कर सकता है। मानसून सत्र के शुरू होने से पूर्व भी सदन में पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनकी सीट पर जाकर भेंट की। लक्ष्य जीएसटी ही है। इस सत्र में 12 अगस्त तक 20 बैठकें होंगी।
इस दौरान राज्यसभा में लंबित 45 विधेयकों में से करीब दस विधेयक को पास कराने पर जोर है। इनमें व्हिसिलब्लोअर सुरक्षा (संशोधन), भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) बिल, दिव्यांग अधिकार बिल भी अहम हैं। ऐसे ही लोकसभा में 11 बिल लंबित हैं। कई अध्यादेशों से संबंधित बिलों को भी पास कराना होगा। इसलिए सभी दलों की जिम्मेदार कोशिश यह होनी चाहिए कि इस सत्र के दौरान अधिक से अधिक बिल पास हो सकें, ताकि संसद का समय व जनता का पैसा व्यर्थ न जाएं। सरकार को भी टकराव की स्थिति को टालना होगा।
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