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अब जाधव को सुरक्षित भारत लाना हो लक्ष्य

नौसेना से रिटायर होने के बाद जाधव ईरान में अपना कारोबार कर रहे थे।

अब जाधव को सुरक्षित भारत लाना हो लक्ष्य

उपरी तौर पर भारत, कुलभूषण जाधव और उनके परिवार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से राहत मिल गई है। पाकिस्तान सेना की एक अदालत द्वारा न्याय के मूलभूत सिद्धांतों को ताक पर रखकर जाधव को फांसी की सजा सुनाए जाने को चुनौती देते हुए आठ मई को भारत ने उनकी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।

नीदरलैंड के हेग में स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने न केवल तत्काल सुनवाई करते हुए पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पत्र भेजकर जाधव की फांसी पर रोक लगाने के निर्देश दिए, बल्कि वो सारे तथ्य अदालत के समक्ष पेश करने को भी कहा जिनके आधार पर सैन्य अदालत ने भारतीय नागरिक को इतनी कठोर सजा सुनाई है।

अगली सुनवाई सोलह मई को होनी है। तब अपना-अपना पक्ष रखने के लिए भारत और पाकिस्तान अदालत में आमने-सामने होंगे। भारत के इस कदम से पाकिस्तान हैरान-परेशान और आश्चर्यचकित है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला आया, पाकिस्तान की विदेश सचिव तहमीना जांजुआ ने इसे अवैध करार देने में जरा सी देर नहीं लगाई।

उन्होंने इसे पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल तक का आरोप अंतरराष्ट्रीय अदालत पर लगा डाला, लेकिन कुछ ही देर बाद तब उनके सुर बदल गए, जब पाक प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में आस्था जाहिर करते हुए कहा कि पाकिस्तान इसके खिलाफ अपील दायर करेगा।

दरअसल, भारत ने पहली कोशिश यही की थी कि इस मुद्दे पर सीधे पाक से बात करे। इस्लामाबाद स्थित भारतीय मिशन ने पंद्रह बार वहां के विदेश मंत्रालय से यह अपील की कि उसे जाधव से मिलने और कानूनी मदद मुहैया कराने की इजाजत दे। हर बार पाकिस्तान ने अपील काे खारिज कर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि जाधव की मां पाकिस्तान जाना चाहती थी ताकि अपने बेटे से मिल सके , परंतु उन्हें भी वीजा देने से इनकार कर दिया गया। कुटिल पड़ोसी के इस रवैये और पूरे मामले में एकतरफा मनमानी करने पर ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख करने का फैसला किया।

जाने-माने अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मजबूती से पूरा मामला अदालत के समक्ष रखा। नतीजा सामने है। पाक को जाधव की फांसी पर रोक लगानी पड़ी। इससे भारत ने राहत की सांस ली है, लेकिन जाधव को बचाने और इंसाफ दिलाने की यह शुरुआत भर है। अभी तक तो पाकिस्तान यही बताने को तैयार नहीं था कि कुलभूषण जाधव को कहां रखा गया है और वह किस हाल में है।

कुछ जानकार तो यहां तक आशंका जाहिर कर रहे थे कि टॉर्चर के दौरान हो सकता है कि जाधव के साथ कोई अनहोनी हो गई हो, इसीलिए वह भारतीय मिशन की मिलने और कानूनी मदद की अपील को लगातार खारिज करता आ रहा है।

कम से कम अब अंतरराष्ट्रीय अदालत के सामने उसे बताना होगा कि जाधव किस हालत में है और उसने जाधव को कानूनी मदद क्यों उपलब्ध नहीं कराने दी, जो कि वियना संधि का खुला उल्लंघन है। भारत कहता आ रहा है कि जाधव को गलत तरीके से ईरान से अपह्रत करके लाया गया और उसे ब्लूचिस्तान से गिरफ्तार दिखाकर वहां गड़बड़ी फैलाने और आतंकी घटनाओं में शामिल होने के झूठे आरोप मढ़ दिए गए।

हकीकत यह है कि नौसेना से रिटायर होने के बाद जाधव ईरान में अपना कारोबार कर रहे थे। वहीं से उन्हें अगवा किया गया और भारत की छवि खराब करने की मंशा से उन पर झूठे आरोप लगाकर बिना सफाई का मौका दिए, फांसी की सजा सुना दी गई। जाहिर है, भारत के कड़े रुख और अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले से फिलहाल पाक हुक्मरानों को मुंह की खानी पड़ी है।

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