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बड़े बदलाव का मंच बना वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन

मोदी सरकार की मंशा इस सम्मेलन के जरिए दुनिया को एक संदेश देने की हैकि भारत में अवसरों की भरमार है।

बड़े बदलाव का मंच बना वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन
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अपने दस साल के इतिहास में, रविवार को शुरू हुआ वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन, पहली बार बिजनेस आधारित कूटनीति का मंच बनता हुआ नजर आया है। इसकी धमक सिर्फ गुजरात की सीमाओं में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में सुनाई पड़ रही है। इस मंच की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैकि अमेरिका के सेक्रेटरी आॅफ स्टेट जॉन कैरी, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोगबे सहित करीब सौदेशों के जानेमाने प्रतिनिधि और उद्योगपति इसमें शिकरत कर ही रहे हैं, साथ ही दुनिया की नामीगिरामी करीब दो हजार कंपनियां और ढाई हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी इसमें अपनी उपस्थिति दर्जकरा रहे हैं।

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दरअसल, मोदी सरकार की मंशा इस सम्मेलन के जरिए दुनिया को एक संदेश देने की हैकि भारत में अवसरों की भरमार है। विदेशी निवेशक इसका लाभ उठाएं और एनडीए सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को सफल बनाएं। केंद्र सरकार की भारत को मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने की योजना है। इससे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जिससे बेरोजगार आबादी को उद्योगों में खपाया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा भी हैकि भारत तेजी से बदल रहा है। यहां विकास के लिए जरूरी तीन डी यानी डेमोक्रेसी (लोकतंत्र), डेमोग्राफी (आबादी) और डिमांड (मांग) अन्य दूसरे देशों की तुलना में एक साथ मौजूद हैं।

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हालांकि निवेशक केवल इतने भर से भारत में पूंजी नहीं लगाएंगे। उसके लिए जरूरी वातावरण बनाने होंगे। देश में कानूनों और व्यवस्थाओं में एक जटिलता व्याप्त है। इसको खत्म करना होगा। हालांकि नरेंद्र मोदी की अगुआई में एनडीए के सत्ता में आने के बाद से ही इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन, रक्षा व बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने, श्रम कानूनों में संशोधन, देश के कर ढांचे में सुधार (जीएसटी पर सहमति बन गई है, इसे 1 अप्रैल, 2016 से पूरे देश में लागू करने की योजना है), पर्यावरण संबंधी मंजूरी में तेजी और नये उद्योग की स्थापना में कागजी प्रक्रियाओं को छोटा करने से लेकर उसके जमीन पर उतारने की अवधि को घटाने आदि फैसले मोदी सरकार ने सरकार में आने के छह माह के अंदर लिए हैं।

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नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तब राज्य में निवेश आकर्षित करने के मकसद से 2003 में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन का आगाज किया गया था। उसके बाद साल दर साल इसका आकार बढ़ने लगा है। यह सम्मेलन तीन दिनों तक चलता है। इस बार इसके सातवें संस्करण का आयोजन किया गया है। इस बार गुजरात को आठ देशों कनाडा, जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका का सहयोग मिला हुआ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के जरिए मोदी सरकार निवेशकों की चिंताओं को दूर करते हुए उन्हें मेक इन इंडिया कार्यक्रम से जुड़ने व बदलते भारत का गवाह बनने के लिए प्रेरित कर सकेगी। यदि सरकार को इसमें सफलता मिलती है तो देश में लोगों की आय और रोजगार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होगी।

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