Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

कुपोषण के साथ-साथ मोटापा भी बना चुनौती

मोटापा आज दुनिया भर में असमय मृत्यु का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।

कुपोषण के साथ-साथ मोटापा भी बना चुनौती

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन के अनुसार भारत तेजी से मोटे या बहुत ज्यादा वजन वाले लोगों का देश बनता जा रहा है। उसने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में देश की करीब 13 फीसदी आबादी यानी 15.3 करोड़ लोग मोटापे की गिरफ्त में फंस सकते हैं। यह संख्या अमेरिका की पूरी आबादी की आधी है। उसने चेताते हुए कहा है कि यदि जल्दी से हालात सुधारने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं किए गए तो यह देश में महामारी का रूप तक ले सकता है। सबसे बड़ा खतरा बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ता मोटापा है। दरअसल, मोटापा आज दुनिया भर में असमय मृत्यु का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। जाहिर है, यदि देश के लोगों में स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए जागरूकता नहीं फैलाई गई समस्या गंभीर होते देर नहीं लगेगी। हालांकि भारत जैसे देश के लिए यह एक विडंबना ही है कि एक तरफ हम कुपोषण से लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ मोटापा की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। एक तरह से यह दोहरी मार है।

13 फीसदी भारतीय मोटापे से ग्रसित, फास्ट फूड ने दी ये बीमारीः रिपोर्ट

आज भी देश की करीब आधी आबादी दो डॉलर प्रतिदिन से कम पर गुजारा करने पर विवश है। आबादी बड़ी होने की वजह से दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब भारत में निवास करते हैं। सरकार के आंकड़े स्वयं स्वीकार करते हैं कि देश की करीब एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रही है। अर्थात इतनी आबादी जैसे-तैसे अपनी जरूरतें पूरी कर पा रही है। भुखमरी और कुपोषण एक बड़ी सच्चाई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे राष्ट्रीय शर्म कहा था। आंकड़े बताते हैं देश के 46 फीसदी बच्चे (0-5 आयु वर्ग) कुपोषित हैं। यानी उन्हें अभी भी शारीरिक विकास के लिए जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में एक तरफ गरीबी से पैदा होने वाली समस्याओं जैसे भुखमरी और कुपोषण से पार पाने के लिए भारत जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमीरी की वजह से आधुनिक जीवन शैली अपनाने के कारण आया मोटापा चिंता का सबब बनता जा रहा है। ये तथ्य स्पष्ट कर रहे हैं कि देश में सामाजिक आर्थिक विषमता की खाई काफी चौड़ी होती जा रही है। इसे पाटा जाना जरूरी हो गया है।

एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल बनेगा घातक, केमिस्ट शॉप पर कसा जाएगा शिकंजा

बहरहाल, मोटापा हमारी विलासितापूर्ण या आधुनिक जीवन शैली की देन है। मसलन तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कहीं आने-जाने के लिए पैदल चलने के बजाय गाड़ियों का इस्तेमाल, फास्ट फूड के बढ़ते चलन के साथ देर तक टीवी देखने तथा पोषण रहित लेकिन कैलोरी से भरपूर भोजन करने, सेवा क्षेत्र के तेज विस्तार जिसके कारण देर तक एक ही जगह बैठकर काम करने की बढ़ती प्रवृत्ति को मोटापे के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है।आज समाज का समृद्ध तबका शारीरिक गतिविधियों से दूर होता जा रहा है, ऐसे में ज्यादा कैलोरी वाले भोजन उनके शरीर पर अतिरिक्त चर्बी जमाने का काम करते हैं, जो कि अंत में शुगर, हाइपरटेंशन, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनती है। इन बीमारियों के कारण आज देश-विदेश में लाखों लोगों की समय पूर्व जान जा रही है। ऐसे में आज लोगों को ऐसी जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है, जिसमें अतिरिक्त कैलोरी को खपाने के लिए शारीरिक गतिविधियां शामिल हों क्योंकि मोटापा एक ऐसी समस्या है, जिससे थोड़ी सी सतर्कता से बचा जा सकता है।

ओरल हेल्थ: जानिए कैसे बनें सजग, कैसे रहें स्वस्थ

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे फेसबुक पेज फेसबुक हरिभूमि को, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

Next Story
Top