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चिंतन : आतंकवाद से निपटने और विकास की ग्लोबल चुनौती

मोदी के इस आह्वान में पाकिस्तान के संदर्भ में चीन के लिए भी संदेश छिपा है।

चिंतन : आतंकवाद से निपटने और विकास की ग्लोबल चुनौती
आसियान सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में पेरिस आतंकी हमले की गूंज साफ सुनाई दी। आमतौर आर्थिक और सामाजिक विकास के मसलों पर चर्चा के लिए आयोजित होने वाले इन सम्मेलनों में इस बार आतंकवाद मुख्य मुद्दा रहा। चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद का पुरजोर विरोध किया। वैसे चीन, यूएस व भारत आसियान के सदस्य नहीं हैं, लेकिन तीनों देश ईस्ट एशिया समूह (कॉकस) यानी ईएसी में शामिल हैं। हालांकि ईएसी आसियान की ही पहल है और अमेरिका के एपेक का जवाब है।
दक्षिण पूर्व एशिया के दस छोटे देश मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रूनेई, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया व वियतनाम आसियान के सदस्य हैं। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया आसियान के प्लस थ्री मेंबर हैं, जबकि आसियान प्लस थ्री और भारत, यूएस, न्यूजीलैंड, रूस, ऑस्ट्रेलिया जैसे मजबूत देश ईएसी में शामिल हैं। इस तरह कुल 18 देश ईएसी में है। इनकी पूरी आबादी को जोड़ें तो सवा तीन अरब के पास पहुंच जाएगी।

इस सभी देशों में देखें तो आज आतंकवाद, समावेशी व संतुलित आर्थिक विकास, सीमा व आंतरिक सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचे का निर्माण और व्यापार संतुलन बड़ी चुनौतियां हैं। इनमें भारत सबसे अधिक आतंकवाद से पीड़ित देश है। इस दृष्टि से जब फ्रांस की राजधानी पेरिस में आतंकी हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद के खिलाफ ग्लोबल वार को मंजूरी दी है और सभी शक्तिशाली देश आतंक के खिलाफ गोलबंद हुए हैं, उसमें आसियान व ईएसी शिखर सम्मेलनों में आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प सकारात्मक संकेत है। नहीं तो अब तक यूरोपीय व अमेरिकी देश आतंकवाद के खिलाफ दोहरा रवैया अपनाते रहे हैं।

आईएस, तालिबान, अलकायदा 'दोहरी' नीतियों की ही उपज मानी जा सकती हैं। अब तक भारत में आतंकी हमला होता है या अन्य एशियाई-अफ्रीकी देशों में आतंकी हमला होता है, तो यूरोपीय-अमेरिकी देशों के लिए यह ग्लोबल आतंकवाद नहीं होता है, वे इस पर प्रतिक्रिया के बदले मुंह फेरते रहे हैं या इसके पीछे स्थानीय कारण ढूंढ़ते हैं। इस ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 10वें ईएसी सम्मेलन में आगाह किया है।

मोदी ने कहा, 'आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में राजनीतिक संतुलन का विचार नहीं आना चाहिए और किसी भी देश को आतंकवाद का इस्तेमाल या सर्मथन नहीं करना चाहिए।' उन्होंने इसके विरुद्ध नए वैश्विक प्रण और रणनीति बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने धर्म को आतंकवाद से अलग करने की वैश्विक प्रतिबद्धता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 'आतंकी गुटों के बीच कोई अंतर नहीं हो। कोई पनाहगाह न हो। कोई वित्त पोषण न हो। हथियारों तक पहुंच न हो।'

मोदी के इस आह्वान में पाकिस्तान के संदर्भ में चीन के लिए भी संदेश छिपा है। अब जिम्मेदारी यूरोपीय-अमेरिकी देशों पर है कि वे ग्लोबल आतंकवाद के खिलाफ कितनी प्रतिबद्धता से लड़ते हैं और कब तक लड़ते हैं। लेकिन अभी पूरे विश्व को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। आतंकवाद से इतर आसियान ने यूरोपीय संघ (ईयू) की तर्ज पर एक क्षेत्रीय आर्थिक क्षेत्र 'आसियान आर्थिक समुदाय' (एईसी) स्थापित करने की घोषणा की है।

एईसी ऐसा एकल बाजार होगा जिसमें वस्तुओं, पूंजी व कुशल र्शम का आवागमन निर्बाध रहेगा। भारत और आसियान के बीच मुक्त व्यापार समझौता एईसी का लाभ उठाने में मदद कर सकता है।

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