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भारत-अफ्रीका के बीच नई साझेदारी शुरू

भारत और अफ्रीका के साथ संबंध चार हजार साल पुराने हैं। दोनों ने उपनिवेशवाद के खिलाफ जमकर आवाज उठाई।

भारत-अफ्रीका के बीच नई साझेदारी शुरू
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नई दिल्ली. देश की राजधानी नई दिल्ली में पांच दिनों तक चले भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन इस संकल्प के साथ समाप्त हुआ है कि भारत-अफ्रीका एक दूसरे की चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगे। यह पहली बार हुआ कि जब सभी 54 अफ्रीकी राष्ट्र भारत की मेजबानी में इस तरह की बैठक के लिए महाद्वीप से बाहर एकत्रित हुए, इनमें से 40 देशों का प्रतिनिधित्व उनके राष्ट्राध्यक्षों ने किया।

इससे पहले दो भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन 2008 व 2011 में क्रमश: नई दिल्ली व अदीस अबाबा में हुए थे, लेकिन तब न तो इतने देश एक साथ आए थे, न ही राष्ट्राध्यक्ष। संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सीट के लिए अफ्रीका का साथ भारत के लिए जरूरी है। यह सुखद हैकि सम्मेलन में प्रस्ताव पास कर सभी अफ्रीकी देशों ने एक स्वर में भारत का सर्मथन किया है। इस बदलाव को देखते हुए कहा जा रहा है हमारे प्रति अफ्रीका का विश्वास बढ़ा है। यह भरोसा ही भारत के साथ उन देशों के संबंधों को नया आयाम देगा।

दरअसल, भारत और अफ्रीका के साथ संबंध चार हजार साल पुराने हैं। दोनों ने उपनिवेशवाद के खिलाफ जमकर आवाज उठाई। इसके बाद दोनों के बीच संबंध गुटनिरपेक्ष आंदोलन के समय में और मजबूत हो गए। कहा जाता है कि लाखों वर्ष पहले भारत-अफ्रीका एक ही भू-भाग था। बाद में हिंदमहासागर से ये दो टुकड़े में विभाजित हुए। इसीलिए दोनों के बीच कई तरह की समानताएं हैं। आज जितनी जनसंख्या भारत की है उतनी ही जनसंख्या अफ्रीकी देशों की है। दोनों की दो तिहाई आबादी 35 साल से नीचे की है। करीब 27 लाख भारतीय इन देशों में लंबे काल से बसे हुए हैं।

अफ्रीकी देशों की युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में भारत अहम भूमिका निभाता है। अभी 25 हजार से ज्यादा अफ्रीकी छात्र भारत में पढ़ रहे हैं। आज अफ्रीका के कई देशों के नेता भारत में पढ़ कर गए हैं। हालांकि इसके बाद भी भारत-अफ्रीका के बीच आर्थिक संबंध चीन और दूसरे पश्चिमी देशों की तुलना में मजबूत नहीं हो पाया है। भारत-अफ्रीका के बीच अभी कारोबार 70 अरब डॉलर का है जबकि चीन से उसका कारोबार 200 अरब डॉलर का है।

दोनों को सांस्कृतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ इस मोर्चे पर भी निकट आने की जरूरत है। हालांकि इस सम्मेलन की सफलता को देखते हुए कहा जा रहा हैकि आने वाले दिनों में दोनों के बीच आर्थिक सहयोग को वह मुकाम हासिल हो सकेगा जिसकी वर्षों से दरकार है। दरअसल, अफ्रीका आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ रहा है। वहां अकूत खनिज भंडार, मानव संपदा और तेजी से उभरता बाजार है। वहीं भारत के पास क्षमता, विकास और तकनीक का ऐसा पैकेज है जो अफ्रीकी जरूरतों को पूरा कर सकता है।

हालांकि वहां बुनियादी ढांचा का अभाव और बिजली की समस्या है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसके ढांचागत विकास और बिजली की समस्या दूर करने की बात कही है। साथ ही अफ्रीका को एक करोड़ डॉलर ऋण देने का ऐलान किया है। इसके अलावा भारत उसको आतंकवाद से लड़ाई में भी सहयोग देगा। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत और अफ्रीका का यह शिखर सम्मेलन सवा दो अरब लोगों और दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी के बीच नई साझेदारी की शुरुआत करेगा।

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