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चिंतन: अब बड़े आर्थिक सुधारों की दिशा में बढ़ाएं कदम

इस बार जीडीपी ग्रोथ की खास बात है कि कृषि क्षेत्र में मजबूती दर्ज की गई है।

चिंतन: अब बड़े आर्थिक सुधारों की दिशा में बढ़ाएं कदम

जब मोदी सरकार अपने दो वर्ष की उपलब्धियों पर जश्न मानी रही है, आर्थिक क्षेत्र से भी सरकार लिए शुकून देने वाली खबर का आना जश्न में किसी 'तड़का' से कम नहीं है। वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.9 फीसदी रही। प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) की जीडीपी दर 7.5 फीसदी, दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) की 7.6 फीसदी और तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) की 7.2 फीसदी रही। इस तरह पूरे वित्त वर्ष 2015-16 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। यह पिछले पांच साल में सर्वाधिक रही है।

वित्त वर्ष 2014-15 में देश की विकास दर 7.2 फीसदी रही थी और 2013-14 में यह 6.6 फीसदी थी। ताजा विकास दर चीन की दर से अधिक है। चीन की विकास दर कैलेंडर वर्ष 2015 की आखिरी तिमाही में 6.8 फीसदी और 2016 की प्रथम तिमाही में 6.7 फीसदी दर्ज की गई, जो 2009 के बाद सबसे कम है। मादी सरकार ने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए साढ़े सात फीसदी जीडीपी की उम्मीद जताई थी। ग्लोबल वित्तीय व रेटिंग एजेंसियों ने 7.1 से 7.3 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जाहिर किया था।

लेकिन जीडीपी सभी उम्मीदों से ज्यादा 7.6 फीसदी रही। चौथी तिमाही में मुख्य रूप से विनिर्माण तथा कृषि क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ने में कामयाब रही है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वास्तविक प्रति व्यक्ति आय भी 6.2 फीसदी बढ़कर 77,435 रुपये हो गई। इसके अलावा कोर सेक्टर से भी सरकार लिए राहत भरी खबर है। देश के प्रमुख 8 उद्योगों के उत्पादन की वृद्धि दर अप्रैल में 8.5 फीसदी रही। मार्च में 6.4 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई थी। रिफाइनरी उत्पादों, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट तथा बिजली के उत्पादन में वृद्धि से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर में यह सुधार हुआ है।

इन उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट तथा बिजली उत्पादन उद्योग शामिल हैं। इन आठ उद्योगों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 38 फीसदी योगदान होता है। वित्त वर्ष 2015-16 में आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 2.7 फीसदी रही, जबकि 2014-15 में इनमें 4.5 फीसदी की वृद्धि हुई थी। चालू वित्त वर्ष 2016-17 में यह वृद्धि बुनियादी उद्योगों के कारोबार में तेजी लौटने का संकेत देती है।

इस बार जीडीपी ग्रोथ की खास बात है कि कृषि क्षेत्र में मजबूती दर्ज की गई है। इस बार के बजट में सरकार ने जिस तरह कृषि क्षेत्र के विकास पर फोकस किया है और अभी मानसून के अच्छे रहने की खबर आ रही है, इससे उम्मीद की जा सकती है कि कृषि क्षेत्र में अभी और तेजी आएगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कृषि क्षेत्र की जीडीपी अगर चार फीसदी पर आ जाए तो भारत डबल डिजिट में ग्रोथ हासिल कर सकता है।

अभी देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान एक फीसदी के करीब ही है। इंडस्ट्री में ग्रोथ आना मोदी सरकार के आलोचकों को जवाब भी है। उद्योग क्षेत्र की सुस्ती को लेकर आलोचक लगातार मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे थे। अब सरकार को चाहिए कि यहां से बड़े औद्योगिक सुधारों के लिए अपनी आर्थिक नीतियों को रफ्तार दे।

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