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चिंतनः ''गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम'' अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की बड़ी पहल

दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाला देश है भारत।

चिंतनः
भारतीय परिवारों में सोना यानी पीली धातु को लेकर हद दर्जे का मोह देखा जाता है तो इसकी वजह भी है। पहला, लोग इसे संकट के समय सहारा मानते हैं। दूसरा, खासकर महिलाएं इससे बने आभूषण को बड़े पैमाने पर प्रयोग करती हैं। शायद यही वजह है कि आज भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाला देश बन गया है।
भारत में हर साल करीब 900 टन सोने का आयात किया जाता है। इस साल अब तक यह आंकड़ा 562 टन तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आज भारत में जितना सोना मौजूद है यदि उसका प्रोडक्टिव प्रयोग होने लगे तो भारत गरीबी के दंश से बाहर निकल जाएगा, लेकिन जो सोना देश के विकास में काम आ सकता था वह आज घरों, मंदिरों में अलमारियों में बंद पड़ा है। अनुमान है कि देश में अभी भी करीब बीस से 25 हजार टन सोना है, जिसका कोई यूज नहीं होता है।
यदि इसे प्रयोग में लाया जाए तो अर्थव्यवस्था को काफी बढ़त मिल सकती है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लांच की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन, गोल्ड सॉवरीन बॉन्ड और गोल्ड सिक्के व गोल्ड बुलियन स्कीमें इस मकसद को पूरा करने में मददगार होंगी। मसलन हजारों टन अनयूज पड़ा सोना बैंकों से होते हुए अर्थव्यवस्था में चलन में आएगा। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा कर सकते हैं और एक निश्चित दर पर ब्याज पा सकते हैं। यह एक प्रकार से वैसे ही होगा जैसे बैंक में आप पैसा रखते हैं और बदले में बैंक आपको ब्याज देता है। गोल्ड सॉवरीन बॉन्ड उन लोगों के लिए है जो सोना को निवेश की दृष्टि से खरीदते रहे हैं। अब वे उसके बदले उसी कीमत वाले बॉन्ड खरीद सकते हैं।
बैंक इस पर भी ब्याज देगा। वहीं बहुत लोग त्योहार के अवसर पर सोने के सिक्के खरीदते रहे हैं उनके लिए अब पहली बार देश में ही बने अशोक चक्र वाले सिक्के जारी किए गए हैं। माना जा रहा है कि जब लोग इन स्कीमों से आकर्षित होकर घरों में रखा सोना बैंकों तक लाएंगे तो आयात कम करना पड़ेगा और निवेश के लिए सोना की मांग कम होगी। इसका बड़ा फायदा यह होगा कि देश का आयात बिल कम होगा और बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इससे जो बचत होगी उसे देश के विकास में उपयोग में लाया जा सकेगा। हालांकि मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों से उनके घरों में रखे सोने को बाहर निकालने का है। इसके लिए स्कीम में जो प्रावधान किए गए हैं, वह कितना कारगर होगा, इसी को लेकर सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
मसलन खाता खोलने से पूर्व आभूषणों की शुद्धता की जांच, जमा होने के बाद उसके पिघलाने, ब्याज पर टैक्स काटने का प्रावधान सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। वहीं 50 हजार रुपये से ज्यादा की कीमत वाले आभूषणों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को खरीदारी का स्रोत बताने का डर भी बाधा बन सकती है। बहरहाल, इन स्कीमों के सफल होने से डेड मनी के रूप में देश में मौजूद हजारों टन सोना प्रोडक्टिव बन सकता है।
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